मायोपिया के इलाज में लेंस का इस्तेमाल

मायोपिया के इलाज में लेंस का इस्तेमाल

आज कल की पीढ़ी का आधे से ज्यादा समय फोन में बिताता है। जिसके कारण बहुत सारी समस्या उत्पन्न होने की संभावनाएँ हो सकती है, जिसमें से एक मायोपिया है। मायोपिया का मूल सिद्धांत यह है कि नेत्रगोलक का बढ़ाव होता है, लेकिन नेत्रगोलक का लंबा होना आपको अन्य समस्याओं, जैसे मोतियाबिंद का जल्दी विकसित होना, रेटिना का फटना और टूटना, ग्लूकोमा, या यहां तक कि तंत्रिका का पतला होना, जो कि एक समस्या है, का कारण बनता है।
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि निकट दृष्टिदोष की स्थिति में नजदीकी वस्तुओं पर फोकस करने में कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन हमारी आंखें दूर की वस्तुओं पर फोकस नहीं कर पाती हैं। बच्चों में आनुवांशिक कारणों से मायोपिया के मामलों का खतरा तब बढ़ जाता है जब उनके मां-बाप दोनों निकट दृष्टिदोष से पीडि़त हों। इसके अलावा पर्यावरण और डिजिटल लगाव के कारण भी कोविड के बाद इसके मामले खतरनाक स्तर पर बढ़ चुके हैं।

मायोपिया से सावधानी

वैसे तो मायोपिया का अर्थ है कि आंख में छवियां रेटिना के सामने ध्यान केंद्रित करती हैं, जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है। नेत्रगोलक बहुत लंबा है या कॉर्निया या लेंस मिहापेन है। हालांकि, परिभाषा मायोपिया के अंतर्निहित कारण को बता नहीं सकती। मायोपिया के दो प्रकार हैं सरल मायोपिया और हाई मायोपिया।

  1. सरल मायोपिया – सिंपल मायोपिया में आंखों की पॉवर -0.5 से -6.0 यानी डायोपर्स से लेकर मायोपिया का एक निम्न से मध्यम स्तर होता है। इस पॉवर में चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग करना सही है। वहीं कॉर्निया के आकार को बदलने के लिए सर्जरी का चुनाव भी कर सकते हैं, जिससे चश्मे या लेंस की आवश्यकता कम हो जाती है।
  2. हाई मायोपिया – हाई मायोपिया में -6.0 डायोप्टर या इससे भी ज्यादा होता है। इस स्थिती में लेंस की आवश्यकता के अलावा, रोगी को आंख को संरचनात्मक क्षति का खतरा होता है क्योंकि इसमें नेत्रगोलक(eyeball) बहुत अधिक फैलता है।

सावधानी रखने की आवश्यकता

  1. समय रहते डॉक्टर की सलाह लें।
  2. किसी भी दूर की चीज़ को एकटक न देखें।
  3. आँखों को ठन्डे पानी से बार-बार धोते रहें।
  4. नींद अच्छी लें।
  5. डॉक्टर की सलाह से आई ड्रॉप लें और उसका उपयोग करें।
  6. स्वस्थ आहार का सेवन जैसे पत्तेदार, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल हैं, नेत्र रोग के विकास की संभावना को काफी कम कर सकते हैं।
  7. व्यायाम दिनचर्या को विकसित करता है।
  8. तनाव से दूर रहें क्योंकि तनाव गंभीर बीमारी का कारण होता है और आंखों की स्थिति में एक प्रेरक कारक के रूप में संदेह किया जाता है।
  9. पोषक तत्वों स्वस्थ दृष्टि का समर्थन करते हैं।
  10. कंप्यूटर का इस्तेमाल करते समय आंखों को दूर रखें।

अगर आप ये सावधानी बरतेंगे तो आप मायोपिया से आप स्वयं का ध्यान रख सकते हैं।

मायोपिया का उपचार

  • एट्रोपिन आई ड्रॉप: कई वर्षों से इसका प्रयोग मायोपिया के लिए किया जाता है। इससे मायोपिया को नियंत्रित करना आसान है।
  • ऑर्थोकार्टोलॉजी: ये विशेष प्रकार का कांटेक्ट लेंस होता है जो सोते समय पहनना होता है। इससे मायोपिया को अस्थायी रूप से ठीक किया जाना संभव है। आपको घंटों तक चश्मे या कांटेक्ट लेंस लगाने की आवश्यकता नहीं होती।
  • मल्टीफोकल कांटैक्ट लेंसेस एवं चश्में: यह विशेष लेंस और चश्मा होता है जिससे मायोपिया को दूर किया जाना संभव है। इससे मायोपिया को नियंत्रित करना संभव है।
  • रिफ्रेक्टिव सर्जरी: यह एक प्रकार की सर्जरी होती है जिससे मायोपिया को ठीक किया जाता है। इससे चश्मे और कांटेक्ट लेंस की आवश्यकता कम होती है।

    मायोपिया नियंत्रण करने के लिए आप ऊपर बताये गए उपचार कर सकते हैं। वहीं इन बातों का ख्याल रखना भी जरूरी है। जिससे आंखों पर बुरा असर ना पड़ें इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है की टीवी देखना कम करें, मोबाइल को जरूरत पर ही इस्तेमाल करें, क्योंकि मोबाइल में आखें गड़ाकर रखने से आंखों की रोशनी कम होती है।

    मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) की सही जांच और प्रभावी इलाज के लिए यशोदा हॉस्पिटल में अनुभवी नेत्र विशेषज्ञों से परामर्श लें, जहाँ आधुनिक तकनीक और उन्नत उपचार सुविधाओं के साथ आपकी आंखों की देखभाल की जाती है।

    यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

    यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

    यशोदा अस्पताल गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली एनसीआर में सर्वश्रेष्ठ सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में से एक है। यशोदा हॉस्पिटल का लक्ष्य सिर्फ दिल्ली एनसीआर, गाजियाबाद और नोएडा में ही नहीं बल्कि पूरे देश में सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल होने के नाते, यशोदा अस्पताल में एक ही छत के नीचे सभी समर्पित विशिष्टताएँ हैं- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सामान्य सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी और आंतरिक चिकित्सा, आर्थोपेडिक्स, मूत्रविज्ञान और कई अन्य।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *