मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता
मानसिक बीमारियों को लेकर हमारे देश में आज भी काफी भ्रम है। एक तरफ तो नए-नए उपग्रह छोड़ने से लेकर साइबर युग की बात कर रहे हैं। और वहीं दूसरी तरफ मानसिक बीमारियों को लेकर अभी भी नीम-हकीमों या छाड़-फूंक वालों के पास पहुंच जाते हैं। आज सभी तरह की मानसिक परेशानियों का इलाज संभव हैं, चाहे वे डिप्रेशन हो उदासी, पागलपन हो, शक या वहमी होना, घबराहट एवं डर लगने की बीमारी हो, सबका इलाज संभव हैं।
मानसिक स्वास्थ्य
मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक बदलाव मानसिक (व्यवहारिक) स्वास्थ्य समस्याओं के मुख्य लक्षण होते हैं। ये व्यक्ति के व्यवहार को परिवर्तित कर देते हैं जिससे उन्हें अपने घर, काम, स्कूल, और व्यापक समाज में अपनी नियमित गतिविधियों को करने में कठिनाई होती है। ऐसा जरूरी नहीं है कि किसी व्यक्ति को अगर मानसिक विकार के साथ खराब मानसिक स्वास्थ्य की समस्या हो तो उनमें व्यवहारिक स्वास्थ्य स्थिति हमेशा मौजूद हों। इसके अलावा, दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य स्थिति होने पर व्यक्ति में व्यवहारिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या होना भी संभव है।
आज समाज का कोई वर्ग तनाव से अछूता नहीं है। उच्च वर्ग से लेकर निम्न वर्ग तक के लोग तनाव की चपेट में हैं। हां तनाव के कारण अलग- अलग जरुर हैं, लेकिन यदि संक्षेप में कहा जाए तो तनाव के मूल में है अपेक्षा। और यह अपेक्षा ही डिप्रेशन का कारण है। डिप्रेशन के बारे में और अधिक जानकारी देते हुए जिंदगी में सुख-दुख, उतार-चढ़ाव तो आते ही रहते हैं। यह स्वाभाविक भी है। लेकिन इनका कुछ हफ्रतों से अधिक समय तक बने रहना आप के जीवन को प्रभावित कर सकता है। और ऐसे में आप एक गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं-जिसका नाम है-डिप्रेशन अवसादा उदासी कि आज की भाग-दौड़ वाली जीवन शैली में व्यस्यकों में हर पांच से एक और प्रत्येक चार परिवार में से एक व्यक्ति मानसिक रोगों का शिकार है।
लक्षण और विकार
- शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य का निकट संबंध है और यह निस्संदेह रूप से सिद्ध हो चुका है कि अवसाद के कारण हृदय और रक्त वाहिका रोग होते हैं।
- मानसिक विकार व्यक्ति के स्वास्थ्य-संबंधी बर्तावों जैसे, समझदारी से भोजन करने, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, सुरक्षित यौन व्यवहार, मद्य और धूम्रपान, चिकित्सकीय उपचारों का पालन करने आदि को प्रभावित करते हैं और इस तरह शारीरिक रोग के जोखिम को बढ़ाते हैं।
- मानसिक अस्वस्थता के कारण सामाजिक समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं जैसे, बेरोजगार, बिखरे हुए परिवार, गरीबी, नशीले पदार्थों का दुर्व्यसन और संबंधित अपराध।
- मानसिक अस्वस्थता रोग निरोधक क्रियाशीलता के ह्रास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- अवसाद से ग्रस्त चिकित्सकीय रोगियों का हश्र बिना अवसाद से ग्रस्त रोगियों से अधिक बुरा होता है।
- लंबे चलने वाले रोग जैसे, मधुमेह, कैंसर,हृदय रोग अवसाद के जोखिम को बढ़ाते हैं।
- दिल का तेजी से धड़कना, श्वास फूलना, पसीना आना आदि, बेहोशी के दौरे आना, तरह-तरह के वहम कना, बार-बार एक ही विचार आने पर परेशान होना या एक ही कार्य बार-बार करना, बुद्धि या स्मृति का कमजोर होना, नशीले पदार्थों का सेवन, दिनचर्या, व्यवहार या क्रियाकलापों में परिवर्तन, चिंताग्रस्त रहना आदि उपरोक्त लक्ष्ण मानसिक अवसाद को हो सकते हैं।
मानसिक दबाव की स्थिति में करें यह
आप का दर्द इस समय इतना अधिक है कि भविष्य में ठीक होने की आशा नहीं लगती। अकेलेपन का एहसास तथा भाग जाने की इच्छा ये ऐसी सच्चाइयां हैं जो आपको परेशान करेंगी। पर ये हमेशा के लिए आपके ऊपर बोझ बनकर नहीं रहने वाली। आपकी निराशा, आशा में बदल जायेगी जैसे ही आप इसके इलाज की तरफ बढ़ेंगे- पर इस वर्तमान सच्चाई को नकारते हुए नहीं, बल्कि यह स्वीकारते हुए कि आज का अंध्कार हटेगा और कल की आने वाली सुबह प्रकाश से भारी होगी, बेहतर होगी।
इलाज
मनोचिकित्सा ने बहुत से लोगों को इससे निपटने के लिए तैयार किया है। इस इलाज में शामिल हैं व्यक्तिगत सलाह, सामूहिक चिकित्सा, मनोविश्लेषण, इत्यादि।इसके बाद चिकित्सा का इस्तेमाल गंभीर रूप से मानसिक दबाव से ग्रस्त लोगों के लिए किया जाता है। यह 3-4 हफ्तों में राहत पहुंचाता हैं।यह अच्छी तरह समझ लें कि आज सभी तरह की मानसिक बीमारियों का इलाज संभव है और ये लाइलाज कतई नहीं हैं।मानसिक रोगों के उपचार के लिए वैचारिक क्रान्ति की आवश्यकता है, स्वयंसेवी और सामाजिक संस्थाएं विशेष रूचि लेकर इस समस्या के निदान में सहयोग दे सकती हैं।
आमतौर पर, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित व्यक्ति अपनी स्थिति को नियंत्रित करने में सक्षम होते हैं। सही देखभाल के साथ, वे क्रियात्मक जीवन जी सकते हैं। कुछ लोगों के लिए, मानसिक बीमारी के प्रभावों से निपटना एक सतत प्रक्रिया होती है। बहुत से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित लोग यह बताते हैं कि जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती है इसके लक्षण कम हो गये हैं या पूरी तरह गायब हो गये हैं। सामान्य रूप से, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का प्रसार 18-25 वर्ष के आयु वर्ग के व्यक्तियों के बीच सबसे अधिक होता है और इसमें 50 वर्ष की आयु के बाद बहुत गिरावट देखी गई है।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के सही निदान और प्रभावी इलाज के लिए यशोदा हॉस्पिटल में अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श लें और स्वस्थ जीवन की ओर एक सही कदम बढ़ाएं।
