मदर्स डे : इस बार मां को दीजिए अच्छी सेहत का उपहार

मदर्स डे : इस बार मां को दीजिए अच्छी सेहत का उपहार
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मां… एक ऐसा शब्द, जिसमें पूरा संसार समाया हुआ है। वह खुद तकलीफ में रहकर भी अपने बच्चों और परिवार की खुशी को सबसे पहले रखती है। कभी बच्चों की चिंता, कभी पति की जरूरतें, तो कभी पूरे परिवार की जिम्मेदारियां — मां अपनी पूरी जिंदगी दूसरों के लिए जीती है। लेकिन जब बात खुद की सेहत की आती है, तो अक्सर वह सबसे पीछे रह जाती है।

हर साल मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1908 में अमेरिका से हुई थी, जब एना जार्विस नामक महिला ने अपनी मां की स्मृति में इस दिन को मनाना शुरू किया। धीरे-धीरे यह दिन दुनिया भर में मातृत्व, त्याग और मां के निस्वार्थ प्रेम को सम्मान देने का प्रतीक बन गया।

लेकिन क्या सिर्फ एक दिन मां के लिए पर्याप्त है? शायद नहीं।
आज जरूरत इस बात की है कि हम अपनी मां की सेहत को गंभीरता से लेना शुरू करें। अक्सर हमें लगता है कि हमारी मां हमेशा स्वस्थ हैं। लेकिन क्या हमने कभी बिना उनके बीमार पड़े, उनका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करवाने के बारे में सोचा है?

महिलाएं खासतौर पर अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज करती रहती हैं। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उनका शरीर धीरे-धीरे थकने लगता है। खासकर 40 वर्ष की उम्र के बाद और रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के समय शरीर में कई महत्वपूर्ण बदलाव शुरू हो जाते हैं।

यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाजियाबाद की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. शशि अरोड़ा बताती हैं कि महिलाएं पूरी जिंदगी दूसरों की देखभाल में लगी रहती हैं और अपनी सेहत को प्राथमिकता नहीं दे पातीं। मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव, हड्डियों की कमजोरी, अत्यधिक पसीना, मूड स्विंग्स, कैल्शियम और आयरन की कमी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। ऐसे में 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी हो जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं को हर वर्ष कुछ जरूरी जांच अवश्य करवानी चाहिए। इनमें सीबीसी, ब्लड शुगर (फास्टिंग एवं एचबीए1सी), लिपिड प्रोफाइल, लिवर एवं किडनी फंक्शन टेस्ट, थायरॉयड प्रोफाइल, विटामिन डी, विटामिन बी12 तथा यूरिन जांच शामिल हैं। इसके अलावा नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और पल्स रेट की निगरानी भी जरूरी है।
यदि मां को लगातार तनाव रहता है, अत्यधिक थकान महसूस होती है या उनकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है, तो हृदय संबंधी जांच जैसे ईसीजी और टीएमटी भी समय-समय पर करवानी चाहिए।

45 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं के लिए कुछ विशेष स्क्रीनिंग जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं, चाहे कोई लक्षण दिखाई दें या नहीं। स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की समय पर पहचान के लिए मैमोग्राफी, पैप स्मीयर और एचपीवी टेस्ट बेहद जरूरी हैं। वहीं ओवरी की जांच के लिए सीए-125 और पेल्विक अल्ट्रासाउंड/टीवीएस करवाना चाहिए। हड्डियों की मजबूती के लिए डेक्सा स्कैन, आंखों की नियमित जांच और दांतों की देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है। स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारियों का यदि शुरुआती चरण में पता चल जाए, तो उनका सफल इलाज संभव है। इसलिए महिलाओं को किसी गंभीर लक्षण का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि नियमित स्क्रीनिंग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।

यदि आपकी मां बार-बार यह कहती हैं कि “मैं बिल्कुल ठीक हूं”, लेकिन उनमें अचानक वजन कम होना, लगातार थकान रहना, शरीर में दर्द, अत्यधिक पसीना, याददाश्त कमजोर होना, सीने में दर्द, सांस फूलना, मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग, पेशाब या मल में खून आना, स्तन में गांठ या लगातार पेट फूलने जैसी समस्याएं दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इस मदर्स डे सिर्फ फूल, केक या उपहार तक सीमित न रहें। अपनी मां को अच्छी सेहत का उपहार दीजिए। उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच, योग, मेडिटेशन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कीजिए।

क्योंकि जो मां पूरी जिंदगी हमारी ताकत बनकर खड़ी रहती है, उसे भी देखभाल और सहारे की जरूरत होती है।

आइए संकल्प लें कि हम सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन अपनी मां की सेहत और खुशियों का ख्याल रखेंगे।
क्योंकि सच मायनों में हर दिन मदर्स डे होना चाहिए।

यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

यशोदा अस्पताल गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली एनसीआर में सर्वश्रेष्ठ सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में से एक है। यशोदा हॉस्पिटल का लक्ष्य सिर्फ दिल्ली एनसीआर, गाजियाबाद और नोएडा में ही नहीं बल्कि पूरे देश में सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल होने के नाते, यशोदा अस्पताल में एक ही छत के नीचे सभी समर्पित विशिष्टताएँ हैं- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सामान्य सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी और आंतरिक चिकित्सा, आर्थोपेडिक्स, मूत्रविज्ञान और कई अन्य।

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