कैंसर क्या है?
कैंसर केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की कोशिकाओं (Cells) की सामान्य वृद्धि और विभाजन की प्रक्रिया में उत्पन्न गंभीर असामान्यता है। सामान्यतः शरीर की कोशिकाएँ एक निश्चित क्रम में बनती, कार्य करती और समय आने पर नष्ट हो जाती हैं। किंतु जब किसी कारणवश कुछ कोशिकाएँ शरीर के प्राकृतिक नियंत्रण से बाहर होकर अनियंत्रित गति से बढ़ने लगती हैं, तब वे एक गांठ (Tumor) अथवा कैंसर का रूप धारण कर लेती हैं।
कैंसर शब्द सुनते ही अधिकांश लोगों के मन में भय उत्पन्न हो जाता है, जबकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान यह सिद्ध कर चुका है कि यदि कैंसर की समय पर पहचान हो जाए तो अनेक प्रकार के कैंसर का सफल उपचार संभव है। इसलिए कैंसर को समझना, उसके लक्षणों को पहचानना तथा समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है। कैंसर शरीर के लगभग किसी भी अंग में हो सकता है। मुख, फेफड़े, स्तन, गर्भाशय ग्रीवा, यकृत, बड़ी आंत, प्रोस्टेट, रक्त तथा त्वचा इसके प्रमुख प्रकार हैं। चिकित्सा विज्ञान में कैंसर को मुख्यतः दो वर्गों में बाँटा जाता है- सौम्य (Benign Tumor) और घातक (Malignant Tumor)। सौम्य गांठ सामान्यतः शरीर के अन्य भागों में नहीं फैलती, जबकि घातक कैंसर रक्त एवं लसीका (Lymphatic System) के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों तक फैल सकता है। इस प्रक्रिया को मेटास्टेसिस (Metastasis) कहा जाता है।
कैंसर होने के पीछे अनेक कारण हो सकते हैं, जिनमें तंबाकू एवं धूम्रपान, शराब का अत्यधिक सेवन, असंतुलित आहार, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, कुछ वायरस (जैसे HPV और Hepatitis B/C), आनुवंशिक कारण, वायु प्रदूषण तथा लंबे समय तक हानिकारक रसायनों के संपर्क में रहना प्रमुख हैं।
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कैंसर के प्रारंभिक लक्षण :
लगातार थकान-
कैंसर के कई रोगियों में सामान्य से अधिक थकान महसूस होती है, जो कि आराम करने के बाद भी बनी रहती है। यह कैंसर से शरीर की ऊर्जा क्षीण होने के कारण होता है। विशेष रूप से रक्त कैंसर (ल्यूकेमिया) में थकान अत्यधिक हो सकती है।
त्वचा में बदलाव-
त्वचा पर असामान्य परिवर्तन जैसे कि नए तिलों का उभरना, पुराने तिल का आकार या रंग बदलना, या कोई निशान जो ठीक न हो; ये लक्षण त्वचा कैंसर का संकेत हो सकते हैं।
बुखार-
कैंसर के रोगियों में बिना किसी स्पष्ट कारण के बुखार बना रह सकता है। यह अक्सर तब होता है जब कैंसर इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है।
असामान्य रक्तस्राव या घाव-
यदि घाव लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा है या शरीर के किसी भी हिस्से से अनपेक्षित रक्तस्राव हो रहा है, जैसे कि पेशाब, खांसी, या मल में खून आना, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है।
भोजन निगलने में कठिनाई-
अगर भोजन निगलने में कठिनाई हो रही है, तो यह गले, अन्नप्रणाली (इसोफेगस), या पेट के कैंसर का लक्षण हो सकता है। इसके साथ सीने या पेट में जलन भी हो सकती है।
खांसी या आवाज़ में बदलाव-
लगातार खांसी, खांसी में खून आना, या आवाज में बदलाव (जैसे भारी आवाज) लंग कैंसर या गले के कैंसर का संकेत हो सकते हैं।
आंत या मूत्र संबंधी समस्याएं-
मल या मूत्र की आदतों में परिवर्तन, जैसे दस्त या कब्ज, मूत्र में खून या पेशाब करने में कठिनाई, खासतौर पर पेट, आंत, या प्रोस्टेट कैंसर के संकेत हो सकते हैं।
स्थायी दर्द-
दर्द शरीर में किसी भी हिस्से में हो सकता है, और अगर यह लंबी अवधि तक रहता है या गंभीर होता जाता है, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है।
गले में खराश या बदलता घाव-
गले में लगातार खराश या ऐसा घाव जो समय के साथ ठीक नहीं हो रहा है, मुंह या गले के कैंसर का संकेत हो सकता है।
अचानक वजन कम होना-
अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन तेजी से घट रहा है, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है। खासतौर पर पैंक्रियाज, फेफड़े, या पेट के कैंसर में वजन में अचानक कमी होती है। यह वजन घटने की प्रक्रिया शरीर की कैंसर से लड़ने की क्षमता के कारण हो सकती है, क्योंकि कैंसर कोशिकाएं तेजी से ऊर्जा का उपभोग करती हैं।
असामान्य गांठ या सूजन-
शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ या सूजन महसूस होना एक सामान्य संकेत हो सकता है। यह गांठ विशेष रूप से ब्रेस्ट, गर्दन, पेट या बगल में महसूस हो सकती है। यह ट्यूमर का परिणाम हो सकता है जो धीरे-धीरे बढ़ता है और शुरुआत में दर्द रहित हो सकता है।
अगर इनमें से कोई भी लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। वर्तमान समय में कैंसर की पहचान के लिए बायोप्सी, मैमोग्राफी, पैप स्मीयर, एंडोस्कोपी, सीटी स्कैन, एमआरआई, पेट-सीटी तथा विभिन्न रक्त परीक्षण जैसी आधुनिक जांचें उपलब्ध हैं। उपचार में रोग की अवस्था के अनुसार शल्य चिकित्सा (Surgery), कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी तथा हार्मोन थेरेपी का उपयोग किया जाता है।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि लगभग 30-50 प्रतिशत कैंसर स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर रोके जा सकते हैं। तंबाकू से पूर्ण दूरी, संतुलित एवं पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम, उचित वजन बनाए रखना, आवश्यक टीकाकरण, समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण तथा कैंसर स्क्रीनिंग इस दिशा में अत्यंत प्रभावी उपाय हैं। कैंसर मृत्यु का पर्याय नहीं, बल्कि जागरूकता की परीक्षा है। जितनी जल्दी इसकी पहचान होगी, उपचार की सफलता की संभावना उतनी ही अधिक होगी। इसलिए कैंसर से डरने के बजाय उसे समझना, उसके प्रति सजग रहना और समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना ही जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा है।
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