कैंसर कितने प्रकार के होते हैं ?
जानें कैंसर के प्रमुख प्रकार एवं उससे जुड़ी अन्य आवश्यक जानकारी
यह जानना जरूरी है कि कैंसर जैसा रोग कोई एक बीमारी नहीं बल्कि 100 से अधिक प्रकार के रोगों का एक बड़ा समूह है। यह शरीर की किसी भी कोशिका (Cell) में उत्पन्न हो सकता है। सामान्य परिस्थितियों में शरीर की कोशिकाएँ नियंत्रित गति से बनती, विभाजित होती है और समय आने पर स्वयं ही नष्ट हो जाती हैं। लेकिन जब किसी कारणवश इन कोशिकाओं के डीएनए (DNA) में परिवर्तन (Mutation) हो जाता है, वे अनियंत्रित रूप से तेजी से बढ़ने लगती हैं। यही असामान्य कोशिकाएं एक गांठ बन सकती है तथा रक्त या लसीका (Lymphatic) तंत्र के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों तक फैल सकती हैं। इस प्रक्रिया को मेटास्टेसिस (Metastasis) कहा जाता है।
चिकित्सकीय दृष्टि से कैंसर का वर्गीकरण मुख्यतः उसे ऊतक या टिशूज या अंग के आधार पर किया जाता है जहां से उसकी यानी कैंसर की शुरुआत होती है।
- कार्सिनोमा (Carcinoma)
यह कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार है और 80 से 90% तक कैंसर इसी श्रेणी में आते हैं । यह शरीर की बाहरी एवं आंतरिक सतह को ढकने वाली एपिथीलियल (Epithelial) कोशिकाओं से विकसित होता है।
इसके प्रमुख उदाहरण–
- स्तन कैंसर
- फेफड़े का कैंसर
- प्रोटेस्ट कैंसर
- बड़ी आंत / कोलन का कैंसर
- त्वचा के कुछ प्रकार के कैंसर
- यकृत एवं अग्नाशय के अनेक कैंसर
- सार्कोमा (Sarcoma)
यह अपेक्षाकृत दुर्लभ कैंसर होता है, जो शरीर के संयोजी (Connective) ऊतकों जैसे हड्डी, मांसपेशी, वसा, उपास्थि (Cartilage), नसों तथा रक्त वाहिकाओं से उत्पन्न होता है। बच्चों और युवाओं में भी यह देखा जा सकता है।
जैसे उदाहरण के लिए–
- हड्डियों का कैंसर (ऑस्टियोसारकोमा)
- मांसपेशियों का कैंसर
- वसा ऊतक का कैंसर
- ल्यूकेमिया (Leukemia)
इसे सामान्य भाषा में रक्त कैंसर कहा जाता है। यह रक्त बनाने वाले ऊतकों, विशेष कर अस्थि मज्जा (Bone Marrow), में विकसित होता है ।इसमें असामान्य श्वेत रक्त कोशिकाएँ अत्यधिक मात्रा में बनने लगती हैं, जिससे शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित होती है।
इसके मुख्य लक्षण–
- बार-बार बुखार होना
- अत्यधिक कमजोरी होना
- खून की कमी होना (एनीमिया)
- बार-बार संक्रमण होना
- शरीर पर नील धब्बे या आसानी से रक्तस्राव होना
- लिंफोमा (Lymphoma)
यह शरीर की लसीका (Lymphatic) प्रणाली का कैंसर है
इसके दो प्रमुख प्रकार होते हैं-
- हॉज किन लिंफोमा (Hodgki Lymphoma)
- नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा (Non-Hodgkin Lymphoma)
इसके प्रमुख लक्षण–
- गर्दन, बगल या जांघ में बिना दर्द की गांठ
- लगातार बुखार बने रहना
- रात में अत्यधिक पसीना
- बिना कारण वजन कम होना
- मायलोमा (Myeloma)
यह प्लाज्मा कोशिकाओं (Plasma Cells) का कैंसर है, जो शरीर में रोगों से लड़ने वाली एंटीबॉडी बनाती है ।
इसके प्रमुख लक्षण हैं–
- हड्डियों में लगातार दर्द बने रहना
- बार-बार संक्रमण होना
- कमजोरी होना
- गुर्दों की कार्य क्षमता प्रभावित होना
- अंगों के आधार पर प्रमुख कैंसर के प्रकार
यह महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है। स्तन की स्वयं जांच (Breast Self-Examination), मैमोग्राफी तथा समय पर उपचार से अधिकांश रोगियों में अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।
धूम्रपान ही इसका सबसे बड़ा कारण होता है। इसके अतिरिक्त वायु प्रदूषण, निष्क्रिय धूम्रपान (Passive Smoking) तथा कुछ औद्योगिक रसायनों का संपर्क भी जोखिम बढ़ाने का काम करता है।
भारत में यही सबसे ज्यादा सामान्य कैंसर में से एक है। गुटखा, तंबाकू, पान-मसाला, सुपारी एवं धूम्रपान इसके प्रमुख प्रमुख कारण होते हैं।
महिलाओं में होने वाला यह कैंसर नियमित पेप स्पीयर जांच तथा एचपीवी (HPV) टीकाकरण से काफी हद तक रोका जा सकता है।
यह मुख्यतः 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में पाया जाता है और प्रारंभिक अवस्था में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देता।
अनियमित खान-पान, कम फाइबर वाला भोजन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता तथा पारिवारिक इतिहास इसके जोखिम को बढ़ाते हैं।
इसके हेपेटाइटिस-बी एवं हेपेटाइटिस-सी संक्रमण, सिरोसिस तथा लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन प्रमुख जोखिम कारक हैं।
Helicobacter pylori संक्रमण, अधिक नमक एवं प्रसंस्कृत (Processed) भोजन तथा धूम्रपान इसका खतरा काफी बढ़ा देते हैं।
यह कैंसर अपेक्षाकृत गंभीर कैंसर माना जाता है वह इसलिए क्योंकि इसके लक्षण अक्सर देर से प्रकट होते हैं, जिससे निदान में विलंब हो सकता है।
यह कैंसर मस्तिष्क की कोशिकाओं में विकसित होता है। और यह लगातार सिरदर्द, दौरे पड़ना, दृष्टि में परिवर्तन तथा शरीर के किसी भाग में कमजोरी होना इसके लक्षण हो सकते हैं।
- त्वचा का कैंसर
ये कैंसर ज्यादा लंबे समय तक सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों के संपर्क में रहना भी इसका प्रमुख रूप से जोखिम कारक होता है।
- थायरॉयड, डिम्बग्रंथि, मूत्राशय एवं गुर्दे का कैंसर
इन कैंसरों में ज्यादातर गर्दन में गांठ, पेट फूलना, श्रोणि दर्द, मूत्र में रक्त, कमर दर्द तथा बिना कारण वजन घटना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। प्रभावित व्यक्ति को ऐसे किसी भी लक्षण को अनदेखा नहीं करना चाहिए।
क्या सभी कैंसर समान रूप से खतरनाक होते हैं?
उत्तर है – नहीं। ऐसे मामलों में सभी कैंसर समान गति से नहीं बढ़ते। कुछ कैंसर बहुत धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जबकि कुछ अत्यंत तेजी से फैल सकते हैं। कैंसर की गंभीरता उसके प्रकार, स्टेज, रोगी की आयु, सामान्य स्वास्थ्य तथा उपचार शुरू होने के समय पर निर्भर करती है। यदि कैंसर का पता प्रारंभिक अवस्था (स्टेज । या ।।) में चल जाए, तो इसके लिए अनेक प्रकार के कैंसर का पूर्ण उपचार संभव हो सकता है। इसी कारण नियमित स्वास्थ्य जांच, कैंसर स्क्रीनिंग, तंबाकू से पूर्ण दूरी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, आवश्यक टीकाकरण तथा किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत किसी योग्य विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लेना बहुत जरूरी होता है।
याद रखें-
कैंसर के जहां सौ से भी अधिक प्रकार होते हैं, लेकिन वही सभी कैंसरों का मूल कारण कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि होती है, यह जानना अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक प्रकार के कैंसर के लक्षण एवं जोखिम कारक व उपचार अलग-अलग भी हो सकते हैं। इससे बचाव के लिए जागरूकता, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली ही कैंसर से बचाव एवं इसके सफल उपचार की सबसे प्रभावी कुंजी है।
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