जानिए कैंसर कैसे फैलता है, और इससे जुडे निथक एवं तथ्य
कैंसर जैसे रोग का नाम सुनते ही अधिकतर लोगों के मन में सबसे बड़ा प्रश्न उठता है कि क्या कैंसर पूरे शरीर में फैल जाता है? यह चिंता स्वाभाविक है, लेकिन इसका उत्तर पूरी तरह परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
लेकिन हाँ, यह भी तथ्य जानना जरूरी है कि कुछ प्रकार के कैंसर यदि समय पर पहचाने न जाएँ और उनका उचित उपचार न किया जाए, तो वे शरीर के अन्य अंगों तक फैल सकते हैं। वहीं दूसरी ओर यदि कैंसर का निदान प्रारंभिक अवस्था में हो जाए और समय रहते उपचार शुरू कर दिया जाए, तो अनेक मामलों में इसे पूरी तरह नियंत्रित या समाप्त कर सफलता पाई जा सकती है।
कैंसर का फैलना चिकित्सा विज्ञान की भाषा में मेटास्टेसिस (Metastasis) कहलाता है। यह वह अवस्था है जब कैंसर की कोशिकाएँ अपने मूल स्थान (Primary Site) से निकलकर रक्त (Bloodstream) या लसीका तंत्र (Lymphatic System) के माध्यम से शरीर के दूसरे अंगों तक पहुँच जाती हैं। वहीं से ये कोशिकाएँ फिर से बढ़ने लगती हैं और नया ट्यूमर का निर्माण करती हैं। नया ट्यूमर उसी मूल कैंसर का होता है, किसी नए प्रकार का कैंसर नहीं।उदाहरण के लिए, यदि स्तन का कैंसर हड्डियों, फेफड़ों, यकृत या मस्तिष्क तक फैल जाए, तो उसे हड्डी का कैंसर या मस्तिष्क का कैंसर नहीं कहा जाएगा, बल्कि मेटास्टेटिक स्तन कैंसर ही माना जाएगा। इसी प्रकार फेफड़े, बड़ी आंत, प्रोस्टेट, गुर्दे तथा अन्य अंगों के कैंसर भी शरीर के कई भागों में फैल सकते हैं, यह संभावना बनी रहती है।
अब जानते हैं कैंसर कैसे फैलता है ?
वैसे तो कैंसर के फैलने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है, जिसमें सबसे पहले कैंसर की कुछ कोशिकाएँ मूल ट्यूमर से अलग हो जाती हैं। ये कोशिकाएँ आसपास के ऊतकों में प्रवेश करती हैं। इसके बाद वे रक्त वाहिकाओं या लसीका तंत्र में पहुँच जाती हैं। यह रक्त या लसीका के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों तक पहुँच जाती हैं। फिर वहाँ यह अनुकूल वातावरण मिलने पर नए कैंसर युक्त गाँठ (Secondary Tumor) का निर्माण होता है। हालाँकि हर कैंसर में यह क्षमता समान नहीं होती। कुछ कैंसर बहुत धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जबकि कुछ अपेक्षाकृत तेजी से फैलते हैं। यह कैंसर के प्रकार, उसकी स्टेज, कोशिकाओं की प्रकृति तथा रोगी के समग्र स्वास्थ्य पर भी निर्भर करता है।
अब जानते हैं कि क्या हर कैंसर फैल सकता है?
इसका उत्तर है नहीं!
यह भी एक बहुत महत्वपूर्ण जानकारी है। सभी कैंसर शरीर में नहीं फैलते। कई कैंसर प्रारंभिक अवस्था में केवल अपने मूल स्थान तक सीमित रहते हैं। इसी समय में इनका उपचार कर दिया जाए तो रोगी के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना काफी अधिक बढ़ जाती है।
इसी प्रकार शरीर में बनने वाली हर गाँठ (Lump) भी कैंसर नहीं होती। अनेक गाँठें सौम्य (Benign) होती हैं, जो शरीर के अन्य भागों में नहीं फैलतीं। यही मूल कारण है कि किसी भी गाँठ के बारे में बिना जाँच के कोई निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
कैंसर के फैलने की संभावना किन बातों पर ज्यादा निर्भर करती है?
कैंसर के फैलने की संभावना कई कारकों से प्रभावित होती है, जैसे –
कैंसर का प्रकार, रोग की स्टेज, ट्यूमर का आकार, कैंसर कोशिकाओं की आक्रामकता, रोगी की प्रतिरक्षा क्षमता, उपचार शुरू होने में देरी जैसे कारण होते हैं, जिससे प्रत्येक रोगी की स्थिति अलग होती है और उपचार की योजना भी उसी के अनुसार बनाई जाती है।
कैंसर से जुडे कई निथक भी हैं; आइए जािें इिका सत्य
निथक 1: कैंसर प्रभावित व्यक्ति को छूने, उसके साथ बैठने या साथ में भोजन साझा करने से फैलता है!
सत्य: इसके उत्तर में कहा जा सकता है कि यह उपरोक्त धारणा पूरी तरह से गलत है। कैंसर कोई संक्रामक रोग नहीं है। यह हाथ मिलाने, गले लगाने, साथ रहने, भोजन साझा करने, एक ही बर्तन का उपयोग करने या सामान्य सामाजिक संपर्क से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में कभी नहीं फैलता।
निथक 2: क्या बायोप्सी करने से कैंसर फैलता है?
सत्य: इसका भी उत्तर यही है कि यह पूरी तरह से निराधार भ्रम है। बायोप्सी कैंसर की पुष्टि करने की सबसे विश्वसनीय जाँचों में से एक है। प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक तरीके से की गई बायोप्सी से कैंसर फैलने का जोखिम अत्यंत नगण्य माना जाता है। प्रभावित रोगी के उपचार की सही योजना बनाने के लिए बायोप्सी बहुत आवश्यक होती है।
निथक 3: क्या कैंसर का मतलब मौत है ?
सत्य: आज चिकित्सा विज्ञान ने कैंसर उपचार में उल्लेखनीय प्रगति की है। सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी तथा प्रिसीजन मेडिसिन जैसी आधुनिक उपचार पद्धतियों से अनेक प्रकार के कैंसर का सफल उपचार संभव है, विशेष कर तब जब रोग का प्रारंभिक अवस्था में ही पता चल जाए।
निथक 4: अगर परिवार में किसी को कैंसर नहीं हुआ है तो तुझे भी कैंसर नहीं हो सकता?
सत्य: वैसे तो अधिकांश कैंसर वंशानुगत नहीं होते। तंबाकू एवं धूम्रपान, शराब, असंतुलित भोजन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, कुछ वायरस संक्रमण, प्रदूषण, बढ़ती आयु तथा अन्य पर्यावरणीय कारण भी कैंसर के जोखिमपूर्ण कारण हो सकते हैं।
निथक 5: क्या कैंसर का इलाज शुरू करिे से पहले इंतजार करिा सुरनित है ?
आवश्यक सत्य: यहाँ इस मामले में यह जानना आवश्यक है कि इसके लिए जितनी जल्दी जाँच और उपचार शुरू होता है, सफल परिणाम की संभावना उतनी ही अधिक बढ़ जाती है। अर्थात हम कह सकते हैं कि कैंसर में समय पर पहचान ही सबसे बड़ा बचाव है। कैंसर के उपचार में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका उसकी प्रारंभिक पहचान निभाती है।
यदि शरीर में कोई असामान्य गाँठ, लगातार खाँसी, बिना कारण वजन घटना, लंबे समय तक घाव न भरना, असामान्य रक्तस्राव, लगातार दर्द या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नज़रअंदाज़ न करें। तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर प्रभावित रोगी की आवश्यक जाँच करना ही उचित है।
अब जािें इसकी सावधानियां
कैंसर फैल सकता है, लेकिन हर कैंसर नहीं फैलता, यह भी जानना जरूरी है। और हर मरीज में यह समान गति से भी नहीं फैलता। समय पर जाँच, सही निदान, आधुनिक उपचार तथा नियमित चिकित्सकीय निगरानी से कैंसर को नियंत्रित किया जा सकता है और अनेक मामलों में पूरी तरह ठीक भी किया जा सकता है।
इसीलिए किसी भी अफवाह या भ्रम पर विश्वास करने की बजाय केवल वैज्ञानिक तथ्यों को ही अपनाना चाहिए। इसके लिए नियमित स्वास्थ्य जाँच कराएँ और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह का अवश्य पालन करें।
याद रखें कैंसर के प्रति जागरूकता और समय पर इसकी पहचान व उचित उपचार ही कैंसर से लड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
