लिवर के लक्षण को पहचानना है आवश्यक
रक्त को शरीर का दर्पण माना जाता है यह दर्पण उतना ही साफ होगा जितना आपका लिवर स्वस्थ होगा क्योंकि रक्त को विषैले पदार्थों से मुक्त करने का कार्य भी लिवर ही करता है। लिवर हमारे शरीर में पांच सौ से भी अधिक गतिविधियों में भाग लेता है। यह शरीर का इकलौता अंग है जो आसानी से क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को बदल सकता है, लेकिन अगर लिवर की कोशिकाएं अधिक संख्या में क्षतिग्रस्त हो गईं हो तो उसके लिये इस क्षति की भरपाई करना संभव नहीं होता है।
लिवर अंग और ग्रंथि दोनों है, यह सैकड़ों रासायनिक क्रियाओं में सहायता करता है जो हमें जीवित रहने के लिये आवश्यक है। रसायनों का स्त्रावण करने के कारण इसे ग्रंथि भी माना जाता है इन रसायनों का उपयोग शरीर के दूसरे अंगों द्वारा किया जाता है। लिवर का भार एक किलों से भी अधिक होता है और इसे फैक्टरी कहा जाता है क्योंकि यह बहुत सारे कार्यों में सम्मिलित होता है।
लक्षण
लिवर की अधिकतर बीमारियों कमजोरी और थकान, भार कम होना, जी मिचलाना, चक्कर आना, उल्टी होना और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके अलावा लिवर की किसी विशेष बीमारी के कारण कुछ विशेष लक्षण भी दिखाई दे देते हैं जैसे:
- रक्त का थक्का बनने में समस्या आना।
- हेपेटाइटिस के कारण हुई लीवर की सूजन से पेट के दायीं ओर ऊपरी भाग में दर्द होना।
- जब लीवर प्रोटीन का मेटाबॉलिज्म ठीक प्रकार से नहीं होने के कारण मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं जिससे थकान और सांस फूलने की समस्या हो सकती है।
- लीवर कैंसर में पेट फूल जाना।
- प्रोटीन की मात्रा कम होने के कारण मांसपेशियों का कमजोर हो जाना।
- सेक्स हार्मोन के असंतुलन के कारण पुरुषों में स्तनों का आकार बढ़ जाना जिसे गायनेकोमैस्टिया कहते हैं।
लिवर की होने वाली समस्या
- लिवर फेलियर- यह तब होता है जब लिवर का बड़ा भाग क्षतिग्रस्त हो जाता है जिसे ठीक नहीं किया जा सकता है। यह जीवन के लिये एक घातक स्थिति है। अक्सर लिवर धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होता है और जिसके बारे में शुरुआत में पता लगाना कठिन होता है। वैसे लिवर की कुछ कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने पर भी वह सामान्य रूप से कार्य करता है जब लीवर के 75 प्रतिशत तक प्रभावित होते हैं तब लिवर ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पाता है।
- फैटी लिवर या स्टियेटोसिस – लिवर में वसा के जमने को फैटी लिवर कहते हैं। लिवर में वसा होना सामान्य है, लेकिन अगर वसा का प्रतिशत 5 से लेकर 10 प्रतिशत से अधिक है, तब इसे लिवर डिजीज कहा जाएगा। यह अपने आप ही ठीक हो जाती है, अक्सर इसके कोई लक्षण भी दिखाई नहीं देते हैं इसके कारण कोई स्थायी नुकसान भी नहीं पहुंचता है। 10 से 20 प्रतिशत लोगों में फैटी लिवर की समस्या देखी जाती है यह 50 से 60 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों में अधिक पाई जाती है। कुछ लोगों में फैटी लिवर के लक्षण थकान और लिवर का आकार सामान्य से बड़ा हो जाना के रूप में दिखाई देते हैं। लिवर में वसा का जमाव अधिक होने से कईं बार यह सूज जाता है और इसकी कार्य करने की गति धीमी हो जाती है।
- लिवर सिरोसिस – सिरोसिस यानी लिवर का स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाना। सिरोसिस में लिवर की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं जिससे लिवर अपनी सामान्य गतिविधियां नहीं कर पाता है। सामान्यतौर पर जब पुरानी कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तब लिवर नई कोशिकाओं का पुन:निर्माण करके स्वयं इस क्षति की भरपाई कर लेता है लेकिन जब लिवर को लगातार क्षति पहुंचती रहती है और इसका अधिकतर भाग क्षतिग्रस्त हो जाता है तो इसे सिरोसिस कहते हैं।
लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता
लिवर प्रत्यारोपण एक सर्जिकल प्रक्रिया है बीमार लिवर को निकालने और दाता से प्राप्त स्वस्थ लिवर को प्रत्यारोपित करने की। अधिकतम लिवर मृत व्यक्ति से प्राप्त किया जाता है लेकिन कई बार जीवित व्यक्ति भी लिवर दान करते हैं। इसमें क्षतिग्रस्त लिवर को स्वस्थ लिवर से बदल दिया जाता है। इसमें या तो पूरा लिवर बदला जाता है या लिवर का कुछ भाग। यह उन लोगों में किया जाता है जिनका लिवर फेल हो चुका होता है। अत्याधुनिक तकनीकों के कारण अब यह सामान्य प्रक्रिया बन गई है और अधिकतर सफल रहती है।
लिवर को स्वस्थ रखने के टिप्स-
- अपना भार औसत रखें; विशेषकर शरीर के मध्य भाग में चर्बी ना बढ़ने दें। इसके लिये पोषक भोजन का सेवन करें जिनमें फाइबर, विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल की मात्रा अधिक और वसा की मात्रा कम हो।
- नियमित रूप से ब्लड टेस्ट कराते रहें ताकि आप अपने रक्त में वसा, कोलेस्ट्रॉल और ग्लूकोज के स्तर पर नजर रख सकें।
- प्रोटीन का सेवन सामान्य से अधिक ना करें; कार्बोहाइड्रेट का सेवन भी कम करें क्योंकि अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट के सेवन से लिवर में फैट जमा हो सकता है।
- चाय, कॉफी और नमक का सेवन कम करें।
- दिन में कम से कम आठ गिलास पानी पिएं।
- तनाव को नियंत्रित रखें क्योंकि इससे पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है जिसका सीधा असर लीवर की कार्यप्रणाली पर पड़ता है।
- सप्ताह में कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज या योगा करें।
लिवर से जुड़ी किसी भी समस्या के सही निदान और उन्नत उपचार के लिए यशोदा हॉस्पिटल में विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क करें, जहाँ आधुनिक तकनीकों और अनुभवी टीम के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं।
