लेबियल हाइपरट्रॉफी: उपचार से बेहतर बचाव
लेबियल हाइपरट्रॉफी एक ऐसी स्थिति है जिसमें लड़की के लेबिया (कभी-कभी योनि होंठ भी कहा जाता है) के एक या दोनों किनारे सामान्य से बड़े होते हैं। यह स्थिति आमतौर पर आंतरिक लेबिया को प्रभावित करती है लेकिन यह बाहरी लेबिया को भी प्रभावित कर सकती है, जो योनि को ढकने वाले वसायुक्त ऊतक की दो बड़ी तहें हैं।
कारण
यह स्थिति तब होती है जब यौवन के दौरान लेबिया सामान्य रूप से विकसित नहीं होता है। कारण अभी तक ज्ञात नहीं है।
- आनुवंशिक कारक: कुछ लोग बड़े या भिन्न आकार के लेबिया के साथ पैदा होते हैं।
- हार्मोनल घटनाएं: युवावस्था में एस्ट्रोजन और अन्य महिला हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे लेबिया के आकार में बदलाव आ सकता है।
- उम्र बढ़ने: बूढ़े होने से लेबियल हाइपरट्रॉफी हो सकती है।
- तंग कपड़े: नियमित रूप से तंग कपड़े पहनने से लेबिया का आकार बदल सकता है।
- साइकिल चलाना: जो महिलाएं नियमित रूप से साइकिल चलाती हैं या प्रतिस्पर्धी साइकिल सवार हैं, उनको बाहरी जननांग क्षेत्र में बार-बार आघात का अनुभव हो सकता हैं जिससे लेबियल हाइपरट्रॉफी का विकास हो सकता है।
लक्षण
- दृश्यमान रूप से बड़ा लेबिया
- बाइक चलाना, दौड़ना या घुड़सवारी जैसी शारीरिक गतिविधियों के दौरान असुविधा
- तंग कपड़े जैसे स्विम सूट या टाइट्स पहनते समय लेबिया में दर्द, तकलीफ और जलन महसूस हो सकती है।
- व्यायाम या संभोग के दौरान अतिरिक्त ऊतकों के घर्षण से तकलीफ हो सकती है।
- स्वच्छता से जुड़े समस्याएं: बड़ी लेबिया टैमपून या मेंसट्रूएल कप का उपयोग करना मुश्किल बना सकती है।
- बार बार होने वाला दीर्घकालीन संक्रमण: जननांग क्षेत्र को साफ करने में कठिनाई होने से जीवाणु संक्रमण की आशंका रहती है।
रोकथाम
- लेबियल हाइपरट्रॉफी को रोकने का कोई सिद्ध तरीका नहीं है।
- ढीले-ढाले और सांस लेने वाले कपड़े पहनें जो असुविधाजनक न हो।
- संभोग के दौरान लुब्रिकैन्ट (स्नेहक) का प्रयोग करें।
- लंबे समय तक साइकिल चलाते समय या बैठते समय गद्देदार सीटों का उपयोग करें।
- बाहरी जननांग क्षेत्र की अच्छी स्वच्छता बनाए रखें।
निदान एवं परीक्षण
यह स्थिति बचपन या युवावस्था के दौरान स्पष्ट हो सकती है। शारीरिक परीक्षण के माध्यम से निदान की पुष्टि की जाती है।
- श्रोणि परीक्षण: श्रोणि परीक्षण, चमड़े में आए किसी परिवर्तन की खोज करने के लिए और दर्द के सटीक स्थान विश्लेषण करने के लिए किया जा सकता है।
- कॉटन स्वाब परीक्षण: डॉक्टर रोगी को अपने दर्द को मूल्यांकन करने के लिए कहते हुए कई स्थानों पर दबाने के लिए एक स्वाब का उपयोग कर सकते हैं।
- रक्त परीक्षण: एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन के स्तर को खोजने के लिए।
- कलचर परीक्षण: यह परीक्षण लेबियल हाइपरट्रॉफी के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया और खमीर जैसे स्रोतों को खोजने के लिए किया जाता है।
- बायोप्सी: योनि क्षेत्र को सुन्न करने के लिए किसी दर्द निवारक का उपयोग किया जाता है, और माइक्रोस्कोप के नीचे परीक्षा करने के लिए वहाँ से थोड़ी मात्रा में ऊतक निकाली जाती है।
उपचार
उपचार व्यक्ति और उनके लक्षणों पर निर्भर करता है। आमतौर पर, यदि लेबियल हाइपरट्रॉफी समग्र स्वास्थ्य में कोई समस्या पैदा नहीं कर रही है, तो उपचार की कोई आवश्यकता नहीं होती है। यदि स्थिति असुविधा और दर्द पैदा कर रही है, तो रोगी लेबियल हाइपरट्रॉफी के इलाज के लिए निम्नलिखित तरीकों में से किसी एक को चुन सकती है-
सर्जरी के बिना लेबियल हाइपरट्रॉफी उपचार
- आरामदायक, सांस लेने वाले कपड़ों और अंतर्वस्त्र का उपयोग अत्यधिक घर्षण पैदा किए बिना बाहरी जननांग का रक्षा करेगा।
- लंबे समय तक बैठे रहने या साइकिल चलाने के दौरान गद्देदार सीटों का उपयोग करने से आराम मिलेगा।
- असुगंधित, प्राकृतिक व्यक्तिगत स्वच्छता उत्पादों (टैम्पोन, पैड या साबुन) का चयन करें, इससे इत्र और रंगों में पाए जाने वाले रसायनों के कारण होने वाली जलन के जोखिम को कम करने में मदद करेगा।
- दर्द और जलन को काबू में रखने के लिए डॉक्टर ओवर-द-काउंटर दवाओं का इस्तेमाल करने की सलाह भी दे सकते हैं।
सर्जरी के साथ लेबियल हाइपरट्रॉफी उपचार
- लेबियाप्लास्टी में सर्जन अतिरिक्त ऊतकों को हटा देते हैं। वे लेबिया के आकार को पुनर्गठित और सिकोड़ते हैं। यह प्रक्रिया आमतौर पर सामान्य संज्ञाहरण (जनरल अनेस्थेसीया) के तहत की जाती है। हालांकि, यह प्रक्रिया बेहोशी की दवा और स्थानीय संवेदनाहारी (लोकल अनेस्थेसीया) देकर भी किया जा सकता है। प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 1 से 2 घंटे लगते हैं।
- डिरेक्ट इक्ज़ीशन (ट्रिम प्रक्रिया) में ऊतकों को हटा दिया जाता है। लेबिया मिनोरा के रूप और बनावट को समाप्त कर दिया जाता है, और सर्जरी के बाद छोटा निशान दिखाई दे सकता है।
- वेज रिसेक्शन में लेबिया मिनोरा से एक वी-आकार का टुकड़ा काट दिया जाता है, और उसके सिरों को एक साथ सिला जाता है। यह ऊतक के प्राकृतिक किनारे को बनाए रखता है और उन्हें देखने में बेहतर बनाता है।
- डी-एपिथेलियलाइजेशन की प्रक्रिया कम हाइपरट्रॉफी स्थिति के लिए सबसे अच्छा है क्योंकि इसमें लेबिया मिनोरा से सामान्य ऊतक को ही छाँटा जाता है जिससे उसके आकार को बनाए रखने में सहायता होती है।
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