खान-पान रखें सही से ख्याल वरना हो सकता है विकार

खान-पान रखें सही से ख्याल वरना हो सकता है विकार

खान-पान संबंधी विकार यानि ईटिंग डिसऑर्डर बेवक्त खान-पान से या जरुरत से ज़यादा खाने या कम खाने से जुड़ा होता है। ये आपके स्वास्थ्य के लिए, शारीरिक अथवा मानसिक दोनों रूपों में हानिकारक साबित होता है। आप अगर किसी बीमारी से ग्रसित है, या आपके शरीर को लगातार पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा, सही समय पे खानपान नहीं कर रहे, तो इन्सान का मन चिडचिडा और क्रोधी स्वाभाव का हो जाता है, बाद में ये परेशानी आपके वेह्वर में भी शामिल हो सकती है। ईटिंग डिसऑर्डर पुरषों तथा महिलओं दोनों में शामिल होता है। युवा महिलाओं और पुरुषों के बीच यह आम है। अलग- अलग उम्र के लोग अपने स्वास्थ्य के अनुसार तंदुरुस्त रहने के लिए कई विशिष्टता अपनाते है, यद्यपि इनमें से कुछ ऐसे हैं जो मोटापे के डर से अपनाते हैं। ईटिंग डिसऑर्डर की शुरुआत आमतौर पर किशोरावस्था में शुरू होता है। इससे लगभग 15 वर्ष की उम्र में 150 में 1 लड़की, 15 वर्ष की उम्र में 1000 में 1 लड़का ग्रसित होते हैं। यह बचपन या युवावस्था में भी शुरू हो सकता है।
लक्षण
• नींद ना आना, मन या दिमाग शांत रहे तो ही इन्सान चिंता मुक्त हो कर अपने नींद पूरी कर सकता है। इन्सान को 8 घंटे की नींद ना सिर्फ शारीरिक संतुस्ती देता है साथ ही मानसिक रूप से मन स्थिर रखता है।
• अत्यंत खाने या ना खाने की सनक, जरुरत से ज़यादा या कम किसी भी चीज़ का सेवन करना हमारे लिए हानिकारक हो सकता है।
• अकेले रहना और दुसरो में रूचि ना रखना, बाहरी गतिविधियों से दूर रहने की इच्छा.
• परेशान या दुखी रहना, ये डिप्रेशन के लक्षण होते है।
• लीवर की समस्या, बेवक्त के भोजन, बहार का तैल्ये खान- पान के लगातार सेवन करने से इन्सान का लीवर कमजोर हो जाता है। इससे जुडी परेशानियां बढ़ जाने से लीवर डैमेज का खतरा भी हो सकता है। साथ ही चेहरे में दाग, फुंसी, तैल्ये त्वचा, एचिंग जैसे समस्या भी सामने आती है।.
• कमजोरी आना, शरीर को बक्टिरिया से लड़ने के लिए पोष्टिक आहार मिलना जरुरी होता है। ना खाने से शरीर कमजोर तो होता ही है साथ ही विभिन्न प्रकार की बीमारियों से भी ग्रसित हो सकते है।
• उलटी की समस्या, लगातार ना खाने से या ज़यादा खाने से आपके पेट की पाचक तंत्र अस्थिर हो जाती है जिससे उलटी, बेचैनी आदि की समस्या होती है।
• वजन बढ़ने का भय, इंसान की मानसिक स्थिति को जकड़ लेता है।
• अगर आप खाने के विकार से पीड़ित हैं, तो यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि आपको मदद चाहिए। यद्यपि यह प्रक्रिया का सबसे दर्दनाक और कठिन हिस्सा हो सकता है। हालांकि विकारों के साथ संघर्ष करने वालों के लिए विभिन्न प्रकार के उपचार के विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन उपचार, या उपचार के संयोजन को खोजना महत्वपूर्ण है, जो आपके लिए सबसे अच्छा काम सकता है। सबसे जरुरी है की खुद को मानसिक रूप से उस संघर्ष के लिए तैयार करना।
ईटिंग डिसऑर्डर 3 विभिन प्रकार में बाटा गया है-
एनोरेक्सिया नर्वोसा
एनोरेक्सिया नर्वोसा संभावित रूप से जीवन के लिए खतरा है जो खान-पान संबंधी विकार है। इन्सान के कद और उम्र के अनुसर वजन का अनुमान लगाया जाता है, और कद के अनुसार वजन कम होना मतलब आप एनोरेक्सिया नर्वोसा से ग्रसित हो सकते हैं। इसमें इन्सान खाना छोड़ के अपने शारीर को दुबला करने में लग्ग जाता है, और जरुरत से ज्यादा शारीरिक गतिविधियों में लग्ग जाता है ताकि अपना वजन को ज्यादा तेजी से घटा सके। एनोरेक्सिया एक साधारण विकार नहीं है इसमें कई लक्षण और प्रभाव होते हैं, और इसके कारण भी जटिल होते हैं। एनोरेक्सिया नर्वोसा के साथ जीने का मतलब है की आप लगातार अपने आदतों को छुपा रहे है। इस समस्या में आपके मित्र व् परिजन आपकी इस समस्या को पहचानने के लिए शुरुवाती दौर में असमर्थ हो सकते है । बहुत कारणों से यह भी कह सकते है की लोग समजना नहीं चाहते की वो किसी डिसऑर्डर से पीड़ित है, या ज़यादातर लोग इसे बुरी आदत समज कर नज़रंदाज़ कर देते है। सही समय पर घटते या बढ़ते वजन के लिए न्यूट्रिशनिस्ट (nutritionist) की सलाह जरुर ले. अगर सही समय पर जाँच ना करवाया जाए तो ऑर्गन फलिउर , अल्पपोषण जैसे परेशानियो का सामना करना पड़ सकता है।
बुलीमिया नर्वोसा
बुलीमिया नर्वोसा इन्सान को तब जकड लेता है, जब हम अकेले बोर होते है, या स्ट्रेस फील करते है. उस वक़्त हम ज़यादातर कुछ खाने क बारे में ही सोचते हैं। अगर आप बुलीमिया नर्वोसा से ग्रसित है तो ज़यादा भोजन करना आपका शाररिक अथवा मानसिक मज़बूरी बन कर सामने आती है। परन्तु अधिक भोजन करके व्यक्ति अतमग्लानी से भर जाता है और कोशिश करता है की जो खाया है उसे शारीर से निकला जाये। जब ज़यादा भोजन करने से आपके वजन बढ़ने की समस्या सामने आती है तो मनुष्य उससे नियंत्रित करने के लिए डाइटिंग, व्यायाम, वजन घटने की दवाई का सहारा लेता है। इससे आचानक होने वाले परिवर्तन से आप अपने शरीर को कष्ट ही देते है, समझदारी से दिनचर्या तय कर आप इससे मुक्त हो सकते है।
बिंज ईटिंग डिसआर्डर
बिंज ईटिंग विकार (बीईडी) को आमतौर पर असामान्य मात्रा में भोजन ग्रहण करने के रूप में जाना जाता है, जबकि इसे रोकना और नियंत्रित करना संभव है परन्तु इसे व्यहवारिक रूप लेने में असमर्थता महसूस होती है। ज्यादा मात्रा में खाने से आप बिंज ईटिंग विकार के शिकार हो सकते है। इस विकार को हम बुलीमिया नर्वोसा से भी जोड़ सकते है, क्योकि हम इसमें भी खाने के लिए मजबूर होते है, अंतर बस इतन होता है की मनुष्य इसमें बढ़ते वजन की परेशानी से निज़ात पाने का प्रयास नहीं करता। ये इतना प्रभावशाली होता है की मनुष्य का अपने आत्म-छवि से एक भावुक रिश्ता बन जाता है, ये मनुष्य को डिप्रेशन की ओर धकेलता है, साथ ही ये मानसिकता मनुष्य को खाने के प्रति और भी लुभाता है। बिंज ईटिंग वाले विकार में लंबे समय तक ग्रसित होने से स्वास्थ्य में नकारात्मत प्रभाव सामने आता है, हृदय रोग, अत्यधिक वजन के कारण संयुक्त दर्द, खराब रक्त परिसंचरण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कि कमजोर लीवर और गुर्दा की समस्या।

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यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

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यशोदा अस्पताल गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली एनसीआर में सर्वश्रेष्ठ सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में से एक है। यशोदा हॉस्पिटल का लक्ष्य सिर्फ दिल्ली एनसीआर, गाजियाबाद और नोएडा में ही नहीं बल्कि पूरे देश में सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल होने के नाते, यशोदा अस्पताल में एक ही छत के नीचे सभी समर्पित विशिष्टताएँ हैं- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सामान्य सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी और आंतरिक चिकित्सा, आर्थोपेडिक्स, मूत्रविज्ञान और कई अन्य।

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