कंधे का दर्द क्यों होता है और कैसे होता है इसका निदान
अगर अचानक से बाएं हाथ की तरफ कंधे में दर्द की अनुभूति हो रही हो, तो कृपया सावधान रहें क्योंकि यह हार्ट अटैक की चेतावनी हो सकती है। खासतौर पर अगर कंधे पर प्रेशर पड़ रहा हो और कंधे में असहनीय दर्द हो रहा हो जो कि छाती से होती हुए बाएं जबड़े, हाथ, और गले में हो रहा हो। या फिर उस समय सांस लेने में दिक्कत, पसीना या चक्कर आ रहे हों, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। दरअसल, मानव शरीर में कंधा सबसे अधिक मूवमेंट करने वाला जोड़ होता है। यह चार मांसपेशियों और उनके टेंडन का एक समूह होता है, जिसे रोटेटर कफ कहा जाता है। जब रोटेटर कफ के आसपास सूजन, क्षति या हड्डी में परिवर्तन होता है, तो इसके परिणाम के रूप में आपकों कंधे में दर्द का अनुभव होता है। यह दर्द हाथ को ऊपर उठाने या आगे-पीछे ले जाने पर हो सकता है। कंधों में पीड़ादायक सनसनी यह संकेत कर सकती है कि आप अपने कंधे पर गलत तरीके से सोए हैं। वहीं यदि कंधों को घूमाने में दिक्कत हो रही है, तो यह टेंडोनाइटिस, बर्साइटिस, फ्रैक्चर, गठिया या कंधे के ब्लेड के नसों के दबने के कारण हो सकती है। इसके अलावा हाथ में कमजोरी से जुड़ा दर्द रोटेटर कफ की चोट, फटे लिगामेंट या आपकी हड्डियों को जोड़ों के ऊतकों के खिलाफ रगड़ने का संकेत होता है।
कंधे में दर्द के लक्षण
- यदि आप कोई काम कर रहे हैं जिससे कंधे के अलावा बाजू में भी लगातार दर्द है।
- किसी वस्तु को उठाते समय कंधे में अकड़न आना।
- बाजू को हिलाते समय एकदम से अत्यधिक दर्द होना, यहां तक कि उसे हिलाने में भी असमर्थ होना।
- जब आपको कोई चोट लगी हो और कंधे में दर्द, सूजन, या रक्ततस्राव हो रहा हो।
- कंधे में दर्द होते समय बुखार, सूजन या लालपन आना।
- कंधे में सूजन आना।
- दर्द जो कि दो से चार हफ्तों में घरेलू उपचार के बाद भी ठीक ना होता हो।
- कंधे को हिलाने-ढुलाने में दिक्कत आना।
- कंधे की जगह पर त्वचा का नीला या लाल रंग होना
क्यों होता है कंधे का दर्द(कारण)
- टेन्डिनाइटिस एवं बर्साइटिस – यह किसी गंभीर चोट या खेल-संबंधी गतिविधियों के कारण हो सकती हैं। 40 वर्ष से ऊपर के लोगों में इस तरह की समस्या ज़्यादा देखने को मिलती है। बात की जाए टेन्डिनाइटिस की, यह तब होती है जब रोटेटर कफ में स्थित टेन्डंस में सूजन या जलन आ जाती है। ऐसा होने पर कंधे में दर्द उत्पन्न होने लगता है। वहीं दूसरी तरफ बर्साइटिस उस स्थिति को कहते हैं जब बर्सा, जो कि शरीर के जोड़ों में स्थित एक तरल भरी थैली है, सूजन या जलन से ग्रस्त हो जाती है। इसके अंदर लुब्रिकेटिंग तरल पदार्थ होता है। इसका काम जोड़ों को घर्षण और रगड़ जैसी समस्याओं से बचाना होता है।
- फ्रोज़न शोल्डर – फ्रोज़न शोल्डर को आप कंधे में दर्द के प्रमुख कारणों में से एक मान सकते हैं। इसे अधेसिव कैप्सूलाइटिस के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसी परिस्थिति है जिसकी वजह से कंधे में दर्द और अकड़न की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसके फलस्वरूप कंधे ओर ऊपरी बांह को हिलाना मुश्किल हो जाता है। यह परेशानी ज़्यादातर 40 से 60 वर्ष के लोगों में देखने को मिलती है। फ्रोज़न शोल्डर होने पर कंधे में दर्द तो आमतौर पर होता ही है, साथ ही समय के साथ-साथ अकड़न में भी वृद्धि होती है। कंधे में दर्द के साथ अकड़न होने पर कृपया डाक्टर से संपर्क कर उपचार ज़रूर करवाएं।
- कैल्सिफिक टेंडिनाइटिस – इस तरह की समस्या आपके लिए दर्द भरी हो सकती है। यह एक ऐसी स्थिति है, जो इंसान के टेंडन्स और मांसपेशियों में कैल्शियम के जमा होने से होती है। कैल्सिफिक टेंडिनाइटिस शरीर के दूसरे हिस्सों में भी हो सकती है, लेकिन ज्यादातर रोटेटर कफ या उसके आसपास के हिस्सों में ही कैल्शियम जमा होने लगता है। आमतौर पर कैल्सिफिक टेंडिनाइटिस से होने वाला दर्द कंधे के आगे व पिछले हिस्सों में होता है।
- आर्थराइटिस – आर्थराइटिस को आप जोड़ों के लिए सबसे बड़ी समस्याओं में से एक मान सकते हैं। कार्टिलेज एक मुलायम इलास्टिक टिशू है जो कि जोड़ों की लंबी हड्डियों के सिरों को ढकता है एवं उनकी रक्षा करता है। आर्थराइटिस जैसी अवस्था में कार्टिलेज धीरे-धीरे खत्म होने लगता है या उसे क्षति पहुंचती है जिसकी वजह से कंधे और बांह को हिलाना मुश्किल हो जाता है। दर्द के अलावा यह समस्या सूजन और जोड़ों को क्षति पहुंचाती है।
- डिस्लोकेशन – कंधे की हड्डी कुछ कारणों की वजह से अपने साकेट से खिसक सकती है और यही कंधे में दर्द का कारण बन सकती है। ह्यूमेरस थोड़ा या फिर पूर्ण रूप से साकेट से बाहर आ सकता है। ऐसी स्थितियां गिरने से, एक्सीडेन्ट से या फिर खेलते समय हो सकती हैं। जिस लोगों को इस तरह की परेशानी हो जाती है, उन्हें सूजन, दर्द, कमज़ोरी, अस्थिरता या फिर मांशपेशियों की ऐंठन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
- अस्थिरता – यह स्थिति तब पैदा होती है जब किसी व्यक्ति के लिगामेन्ट्स और मांसपेशियां इतनी मज़बूत नहीं रह पाती कि वे कंधे की हड्डियों को साकेट में पकड़ के रख सकें। अस्थिरता होने का एक प्रमुख कारण डिस्लोकेशन भी है। यानि कि जितनी बार एक व्यक्ति डिस्लोकेशन से जुझेगा, उतना ही कंधे की स्थिरता कम होती रहेगी। इसके साथ ही लिगामेन्ट्स, जो कि ऐसे टिशूस हैं कि हड्डियों को दूसरी हड्डियों से जोड़कर रखते हैं, समय के साथ या फिर प्राकृतिक तौर पर ढीले हो जाते हैं। इस तरह की स्थिति का कारण ऐसी गतिविधियां हैं जिनमें बार-बार व्यक्ति अपनी बांह को सिर के ऊपर ले जाता है, जैसे कि स्विमिंग या टेनिस में।
- फ्रेक्चर – हड्डी का टूटना शरीर के अन्य भागों के साथ-साथ कंधे में भी देखने को मिल सकता है।
- विभाजन – इस तरह की परिस्थति तब घटित होती जब कॉलरबोन और शोल्डर ब्लेड के बीच का संबंध बाधित हो जाता है। आमतौर पर यह परेशानी खेल-संबंधी गतिविधियों में देखने को मिलती है जब व्यक्ति अपने कंधे के बल गिर जाता है। ऐसा होने पर कंधे में तेज़ दर्द, सूजन, और नील जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
उपचार
अगर आप कंधे में अत्यधिक दर्द महसूस कर रहे हैं और इससे आपको परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो कृपया डॉक्टर से शीघ्र संपर्क करें। लेकिन यदि दर्द सामान्य है, तो आप कुछ बिंदुओं को ध्यान में रख सकते हैं।
- कंधे पर बर्फ का सेक करें। बर्फ को किसी कपड़े में डालकर कंधे की जगह पर कुछ समय के लिए रखें। ऐसा दिन में 3 से 4 बार दो से तीन दिन करने पर कंधे में दर्द से आराम मिल सकता है।
- अपने कंधे से जुड़ी गतिविधियों को कुछ दिन के लिए विराम दें।
- अगर समस्या रोटेटर कफ से जुड़ी है तो आप डाक्टर की सलाह से कुछ व्यायाम कर सकते हैं। खासतौर से वो व्यायाम जिससे कंधे की मांसपेशियां और रोटेटर कफ टेन्डंस मज़बूत हों।
- यदि आप टेन्डिनाइटिस से उबर रहे हैं तो उचित व्यायाम करें जिससे फ्रोज़न शोल्डर की समस्या ना हो।
- सोते समय अपने तकिए को सही तरह से कंधे के नीचे रखें, अन्यथा तकिए को गलत तरीके से रखना भी दर्द का कारण बन सकता है। कोशिश करें कि ऐसा तकिया चुना जाए जो ज़्यादा ऊंचा ना हो और ज़्यादा सख्त भी ना हो।
कंधे के दर्द का सही और प्रभावी इलाज पाने के लिए यशोदा हॉस्पिटल अवश्य आएं, जहाँ अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक तकनीक और बेहतर देखभाल के साथ सटीक निदान और उपचार प्रदान किया जाता है।
