कमर के साइज से जानें हार्ट अटैक और डायबिटीज का खतरा

कमर के साइज से जानें हार्ट अटैक और डायबिटीज का खतरा

कमर के साइज से हार्ट अटैक और डायबिटीज का खतरा पता लगाया जा सकता है। जब पेट और कमर के आसपास अधिक चर्बी जमा हो जाती है, तो यह विसरल फैट (आंतों के आसपास की वसा) का संकेत हो सकता है, जो मेटाबॉलिक और हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकता है। यदि आपकी कमर मोटी (पुरुषों की 42 व महिलाओं की 37 इंच से अधिक) है, तो आपको हार्ट अटैक का खतरा अधिक है। ऐसे व्यक्ति के शरीर में यदि गुड कोलेस्ट्रॉल कम है और ब्लड प्रेशर व शुगर का मरीज है, तो बेहद सतर्क रहने की जरूरत होती है।
• हृदय रोग के ज्यादातर मरीज मोटापे के शिकार हो रहे हैं। करीब 60 फीसदी ऐसे मरीज हैं, जिनकी उम्र 50 से कम है। मोटापे से हृदय की बीमारियां घेर लेती हैं। लोग मेटाबोलिक सिंड्रोम की चपेट में आ जाते हैं, इससे भविष्य में डायबिटीज, गुर्दे खराब होना, हृदय रोग और लकवा जैसे रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। पेट बढ़ने से इंसुलिन के प्रति प्रतिरोध विकसित होने लगता है, जिससे शुगर हो जाता है। मोटापा होने के कारण खराब हार्मोन शरीर में बनने लगते हैं, जो हाईपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) का शिकार बना देते हैं।
• बीपी, शुगर, गुड कोलेस्ट्रॉल की कमी के साथ अगर कमर बढ़ती है तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। धूम्रपान करने वालों की हृदय की धमनियां सिकुड़ने लगती हैं। इस वजह से भी हृदयाघात की आशंका ज्यादा रहती है। हो सकता है कि आप डायबिटीज और हृदय से बचने के लिए नियमित रूप से अपना वजन चेक करते रहते हों। वैसे तो यह सही है क्योंकि यह आपको अगर वजन अधिक है तो कम करने में मदद करता है। लेकिन वेट स्केल आपको यह नहीं बताता है कि आपके शरीर का कौन सा भाग ऐसा है जिसमें ज्यादा फैट जमा है या ज्यादा फैट जमा होने के कारण सेहत को कौन सा खतरा है। आमतौर पर पेट के हिस्से में जमा चर्बी को खतरनाक माना जाता है। यह उन लोगों के लिए एक बड़ा संकेत हो सकता है, जिन लोगों में हृदय रोगों की अधिक संभावना रहती है। हाल ही में हुए एक शोध ने यह बताया किया है कि आपके कमर की बढ़ती चर्बी या मोटापा जिसे हम आपकी कमर का चौड़ाई भी कह सकते हैं, वह आपके हृदय रोगों के खतरे को समझने में मदद कर सकती है।
• जिन लोगों के पेट के आसपास अधिक चर्बी होती है यानी उनके शरीर का आकार सेब की तरह दिखने लगता है, उन्हें हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज और समय से पहले मृत्यु का खतरा अधिक होता है। जबकि नाशपाती के आकार के व्यक्तियों के लिए (जिनके कूल्हों और जांघों के आसपास अधिक चर्बी होती है) स्वास्थ्य खतरे कम होते हैं। यदि प्री-मेनोपॉज़ल महिलाएं हैं और उनका निचला शरीर अधिक चर्बीयुक्त या वजन ज्यादा है, तब भी हृदय रोगों की संभावना रहती है। कमर का साइज के साथ बीएमआई मापने से चिकित्सक को इस प्रकार शरीर के आकारों के बीच अंतर करने में मदद मिलती है।
• आपको कमर के साइज के साथ साथ बीएमआई भी निकालनी चाहिए। बॉडी मास इंडेक्स से व्यक्ति में फैट की मात्रा का पता चलता है। इसके लिए व्यक्ति की हाइट को उसके वजन से भाग करने पर शरीर में कितना फैट है पता चलता है। यही नहीं हमें कमर के साइज के साथ साथ अन्य लक्षणों को व ब्लड प्रेशर भी नापना चाहिए। लेकिन यह पूरी तरह से ठीक नहीं। बीएमआई की भी कुछ कमियां रहती हैं। उदाहरण के तौर पर जो लोग वेट लिफ्ट करते हैं उनका मसल मास अधिक होने के कारण उनकी हाइट के मुकाबले वजन बढ़ जाता है और बीएमआई के मुताबिक वह बढ़ते फैट या मोटापे की श्रेणी में आते हैं लेकिन वैसे वह फिट कहलाते हैं।
• बढ़ती उम्र के साथ-साथ मसल लॉस भी होता है। पर धीरे-धीरे चर्बी पेट के आसपास बढ़ने लगती है। ऐसे में भले ही आपका वजन और बीएमआई एक हो लेकिन बॉडी शेप के अनुसार हृदय रोगों का खतरा बढ़ने लगता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति का बीएमआई पहले जितना ही है लेकिन उनकी बॉडी शेप में बदलाव हुआ है तो भी उन्हें बढ़ते रिस्क के प्रति सावधान रहना चाहिए। दरअसल कमर का साइजअधिक होते ही मृत्यु दर भी खुद ब खुद ही अधिक हो जाती है।
• पाया गया है कि जिन लोगों का कमर का साइज अधिक था, उन्होंने जब से एक्सरसाइज आदि शुरू की तो उनके वजन के स्केल में तो ज्यादा बदलाव नहीं आया, लेकिन उनकी कमर के साइज में बदलाव आया और उन्हें जो कपड़े टाइट थे वह अब फिट आने लगे। इससे उनका सेहत का रिस्क भी कम हुआ।
यह समस्या होने पर बढ़ता है खतरा

  1. ट्राई ग्लिसराइड (खून में मौजूद फैट) 150 मिलीग्राम प्रति डीएल से अधिक हो।
  2. गुड कोलेस्ट्रॉल पुरुषों का 50 एमजी, महिलाओं का 40 मिलीग्राम से कम हो।
  3. ब्लड प्रेशर 85/135 से ज्यादा हो।
  4. खाली पेट शुगर 100 मिलीग्राम प्रति डीएल से ज्यादा हो।

इस तरह से रखें सेहत ख्याल

  1. फल और हरी सब्जियां खाएं
  2. पर्याप्त नींद जरूर लें
  3. बीपी, शुगर है तो नियमित दवा लें
  4. नियमित व्यायाम करें
  5. खाने में ज्यादा नमक न लें
  6. ज्यादा तला भुना खाने से बचें

हृदय रोग और डायबिटीज के जोखिम की सही जांच व प्रभावी उपचार के लिए यशोदा हॉस्पिटल में विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लें, जहाँ आधुनिक सुविधाओं और अनुभवी चिकित्सकों द्वारा बेहतर देखभाल सुनिश्चित की जाती है।

यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

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यशोदा अस्पताल गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली एनसीआर में सर्वश्रेष्ठ सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में से एक है। यशोदा हॉस्पिटल का लक्ष्य सिर्फ दिल्ली एनसीआर, गाजियाबाद और नोएडा में ही नहीं बल्कि पूरे देश में सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल होने के नाते, यशोदा अस्पताल में एक ही छत के नीचे सभी समर्पित विशिष्टताएँ हैं- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सामान्य सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी और आंतरिक चिकित्सा, आर्थोपेडिक्स, मूत्रविज्ञान और कई अन्य।

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