पित्ताशय (पित्त की थैली) हटाने के साइड इफेक्ट

पित्ताशय (पित्त की थैली) हटाने के साइड इफेक्ट

पित्ताशय (पित्त की थैली) में पथरी होना आज एक आम बात हो गई है। आज दस में से आठ व्यक्ति इस समस्या से ग्रस्त है। चूंकि यह हमारे शरीर का एक अहम अंग होता है। जब व्यक्ति को पित्त की थैली की पथरी होती है, तो उसे गंभीर दर्द का अनुभव करना पड़ सकता है। जब दर्द और गंभीरता बढ़ती जाती है, तो डॉक्टर पित्त की थैली को निकालने की सलाह देते हैं। इस स्थिति में पित्त बाहर निकल जाता है, जिसकी वजह से कई बार लोगों को पित्त की थैली को निकालने के बाद भोजन को पचाने में दिक्कत होती हैं। इसके साथ ही पित्त की थैली निकालने के बाद कई शारीरिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।

पित्त की थैली निकलवाने के नुकसान

  • पेट दर्द – पित्त की थैली निकालने के बाद आपको लंबे समय के लिए पेट दर्द हो सकता है। कई बार खाने के बाद आप इसे पेट दर्दको ज्यादा महसूस कर सकते हैं। दरअसल, ये कुछ लोगों को सर्जरी के बाद पहले महीने के दौरान फैट युक्त खाद्य पदार्थों को पचाने में थोड़ी अधिक कठिनाई होने के कारण हो सकता है। ऐसे में आपको गॉल ब्लैडर रिमूवल के बाद कम फैट वाला और सिंपल खाना खाने की कोशिश करनी चाहिए। साथ ही कोशिश करें कि कोई भी खाना ऐसा ना खाएं जिसे पचाने में पेट को ज्यादा मेहनत करनी पड़े।
  • कब्ज की समस्या – कब्ज की समस्यागॉन ब्लैडर निकलने के बाद कुछ लोगों को दर्द निवारक दवाओं के कारण भी कब्ज की समस्या हो सकती है। ऐसे में आपको इस परेशानी को ठीक करने के लिए फाइबर से भरपूर आहार जैसे बीन्स, चोकर वाला आटा, साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर फल और सब्जियां का सेवन करना चाहिए।
  • डायरिया – गॉल ब्लैडर निकालने के बाद बहुत से लोगों का पेट खराब रहता है और उन्हें अक्सर दस्त की समस्या होती रहती है। जब गोल ब्लैडर निकल जाता है, तो शरीर में बाइल जूस कंट्रोल नहीं हो पाता है जिससे यह आपकी छोटी आंत में अधिक लगातार, लेकिन कम मात्रा में प्रवाहित होगी। इससे कई लोगों में सर्जरी के बाद पहले कुछ दिनों तक दस्त हो सकते हैं। ये कुछ लोगों में दो-तीन दिनों से अधिक समय तक रह सकता है और ऐसे में आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • खाने को पचाने में मुश्किल – गॉल ब्लैडर निकालने से आपको ज्यादा तेल मसाला वाले खाने को पचाने में मुश्किल हो सकती है। दरअसल, गॉल ब्लैडर निकलने से पहले तो आपका शरीर बाइल जूस की मदद से फैट को तोड़ कर पचा लेता था पर अब शरीर को डाइरेक्ट आंतों द्वारा फैट पचाने में मुश्किल हो सकती है। इसमें शरीर को समय लग सकता है। साथ ही सर्जरी के दौरान आपको जो दवाएं दी गई थीं, वे भी अपच का कारण बन सकती हैं। यह आम तौर पर लंबे समय तक नहीं रहता है, लेकिन कुछ रोगियों में दीर्घकालिक दुष्प्रभाव विकसित होते हैं, जो आमतौर पर पित्त नलिकाओं में पीछे रह गए अन्य अंगों या पित्त पथरी में पित्त के रिसाव के कारण होता है।
  • हमेशा बीमार महसूस करना – गॉल ब्लैडर निकलने के बाद आप लंबे समय तक बीमार महसूस कर सकते हैं। ये सब दवाइयों के कारण होता है, जो कि आपके शरीर पर दूसरे नुकसान पहुंचाते हैं। जैसे कि भारी दवाओं के कारण आपको नींद आ सकती है। आपको शरीर भारी-भारी लग सकता है। मन बेचैन हो सकता है और आप लंबे समय के लिए बीमार हो सकते हैं।
  • पीलिया – गॉल ब्लैडर निकलने के बाद आपको पीलिया हो सकता है। दरअसल, कुछ मामलों में गॉल ब्लैडर की सर्जरी के बाद आपके बाइल डक्ट में कुछ पथरी रह जाते हैं। यह आपकी छोटी आंत में पित्त के प्रवाह को ब्लॉक कर सकता है और इसके परिणामस्वरूप सर्जरी के तुरंत बाद दर्द, बुखार, मतली, उल्टी, सूजन और पीलिया हो सकता है। ब्लॉकेज और इंफेक्शन पैदा भी कर सकता है। इसके कारण आपको बुखार और जॉन्डिस के लक्षण महसूस हो सकते हैं।
  • थकान और मूड स्विंग्स – गॉल ब्लैडर निकलने के बाद आपको लंबे समय तक थकान, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स महसूस हो सकते हैं। ये सब दवाओं के कारण और शरीर में खराब पाचन क्रियाओं के कारण हो सकता है। ऐसे में अपने डॉक्टर से पूछ कर अपनी डाइट सही करें।

    स्वस्थ रहने के खास टिप्स
  • मौसमी सब्जियों और फलों के साथ अपने दिन की शुरुआत करें।
  • ज्यादा मसालेदार, नमकीन, मीठे या फैट से भरपूर खाद्य पदार्थों को खाने से बचें।
  • सर्जरी के बाद फाइबर ज्यादा खाएं। इसमें आप साबुत अनाज, नट्स, सीड्स, गोभी, ब्रोकोली और फूलगोभी का सेवन कर सकते हैं।
  • लाइट एक्सरसाइज करें, जैसे वॉकिंग। पित्त की थैली निकालने के बाद बहुत ज्यादा एक्सरसाइज ना करें।

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यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

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यशोदा अस्पताल गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली एनसीआर में सर्वश्रेष्ठ सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में से एक है। यशोदा हॉस्पिटल का लक्ष्य सिर्फ दिल्ली एनसीआर, गाजियाबाद और नोएडा में ही नहीं बल्कि पूरे देश में सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल होने के नाते, यशोदा अस्पताल में एक ही छत के नीचे सभी समर्पित विशिष्टताएँ हैं- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सामान्य सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी और आंतरिक चिकित्सा, आर्थोपेडिक्स, मूत्रविज्ञान और कई अन्य।

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