किडनी (गुर्दा) की सम्पूर्ण जानकारी होनी है जरूरी

किडनी (गुर्दा) की सम्पूर्ण जानकारी होनी है जरूरी

किडनी दुनिया में सबसे अधिक प्रत्यारोपित किया जाने वाला अंग है। किडनी फेलियर की दर तेजी से बढ़ रही है। जो लोग गुर्दे की बीमारी के अंतिम चरण में हैं, उन्हें किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। इसका मतलब यह है कि उनकी दोनों किडनियों ने या तो काम करना बंद कर दिया है या फिर वे दस फीसदी से ज्यादा काम नहीं कर पाती। वर्तमान स्थिति के अनुसार भारत में लगभग 2,20,000 लोगों को किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता है।

किडनी के मुख्य कार्य

  1. खून का शुद्धीकरण- किडनी निरंतर कार्यरत रहकर शरीर में बनते अनावश्यक जहरीले पदार्थों को पेशाब द्वारा बाहर निकालती है।
  2. अपशिष्ट उत्पादों को निकलना – अपशिष्ट उत्पादों को हटाकर रक्त की शुद्धि करना किडनी का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। हमारे द्वारा जो भोजन लिया जाता है उसमें प्रोटीन होता है। यह प्रोटीन शरीर को आरोग्य रखने और शरीर के विकास के लिए आवश्यक है। प्रोटीन का शरीर द्वारा उपयोग किया जाता है किन्तु इस प्रक्रिया में कुछ अपशिष्ट पदार्थों का उत्पादन होता है। इन अपशिष्ट पदार्थों का संचय हमारे शरीर के अंदर जहर को बनाए रखने के समान है। हमारी किडनी, रक्त से विषाक्त अपशिष्ट उत्पादों को छानकर उसे शुद्ध करती हैं। ये विषाक्त पदार्थ अंततः पेशाब से विसर्जित हो जाते हैं।
  3. शरीर में पानी का संतुलन – किडनी शरीर के लिए जरूरी पानी की मात्रा को रखते हुए अधिक जमा हुए पानी को पेशाब द्वारा बहार निकालती है। जब किडनी ख़राब हो जाती हैं तो वे इस अतिरिक्त पानी को शरीर से बाहर करने की क्षमता को खो देती हैं, शरीर में अतिरिक्त पानी एकत्रित होने के कारण शरीर में सूजन हो जाती है।
  4. अम्ल एवं क्षार का संतुलन – किडनी शरीर में सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड, मैग्नीशियम, फास्फोरस, बाइकार्बोनेट वगैरह की मात्रा यथावत रखने का कार्य करती है। उपयुक्त पदार्थ ही शरीर में अम्ल एवं क्षार की मात्रा के लिए जिम्मेदार होते हैं। सोडियम की मात्रा बढ़ने या घटने से दिमाग पर और पोटैशियम की मात्रा बढ़ने या कम होने से हृदय और स्नायु की गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
  5. खून के दबाव पर नियंत्रण – किडनी कई हार्मोन बनाती है जैसे एंजियोटेंसिन, एल्डोस्टेरोन, प्रोस्टाग्लैंडिन इत्यादि। इन हार्मोनों की सहायता से शरीर में पानी की मात्रा, अम्लों एवं क्षारों के संतुलन को बनाए रखती है। इस संतुलन की मदद से किडनी शरीर में खून के दबाव को सामान्य बनाये रखने का कार्य करती है। किडनी की खराबी होने पर होर्मोन के उत्पादन एवं नमक और पानी के संतुलन में गड़बड़ी से उच्च रक्तचाप हो जाता है।
  6. रक्त कणों के उत्पादन में सहायता – खून में उपस्थित लाल रक्तकणों का उत्पादन एरिथ्रोपोएटिन की मदद से अस्थिमज्जा में होता है। एरिथ्रोपोएटिन किडनी में बनता है किडनी के फेल होने की स्थिति में यह पदार्थ कम या बिल्कुल ही बनना बंद हो जाता है, जिससे लाल रक्तकणों का उत्पादन कम हो जाता है और खून में फीकापन आ जाता है, जिसे एनीमिया (खून की कमी का रोग) कहते हैं।
  7. हड्डियों की मजबूती – स्वस्थ हड्डियों को बनाए रखने के लिए किडनी, विटामिन डी को सक्रिय रूप में परिवर्तित करती है जो भोजन से कैल्शियम के अवशोषण, हड्डियों और दांतों के विकास और हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक होता है।

    किडनी की संरचना
  • किडनी शरीर का खून साफ कर पेशाब बनाती है। शरीर से पेशाब निकालने का कार्य मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्र नलिका द्वारा होता है।
  • स्त्री और पुरुष दोनों के शरीर में सामान्यतः दो किडनी होती है।
  • किडनी पेट के अंदर, पीछे के हिस्से में, रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ (पीठ के भाग में), छाती की पसलियों के सुरक्षित तरीके से स्थित होती है ।
  • किडनी, पेट के भीतरी भाग में स्थित होती हैं जिससे वे सामान्यतः बाहर से स्पर्श करने पर महसूस नहीं होती।
  • किडनी, राजमा के आकर के एक जोड़ी अंग हैं। वयस्कों में एक किडनी लगभग 10 सेंटीमीटर लम्बी, 6 सेंटीमीटर चौडी और 4 सेंटीमीटर मोटी होती है। प्रत्येक किडनी का वजन लगभग 150 – 170 ग्राम होता है।
  • किडनी द्वारा बनाए गये पेशाब को मूत्राशय तक पहुँचाने वाली नली को मूत्रवाहिनी कहते हैं। यह सामान्यत: 25 सेंटीमीटर लम्बी होती है और विशेष प्रकार की लचीली मांसपेशियों से बनी होती है।
  • मूत्राशय पेट के निचले हिस्से में सामने की तरफ (पेडू में) स्थित एक स्नायु की थैली है, जिसमें पेशाब जमा होता है।
  • स्त्री और पुरुष दोनों में किडनी की रचना, स्थान और कार्यप्रणाली एक समान होती है।
  • वयस्क व्यक्ति के मूत्राशय में 400 – 500 मिलीलीटर पेशाब एकत्रित हो सकता है। जब मूत्राशय की क्षमता के करीब पेशाब भर जाता है तब व्यक्ति को पेशाब त्याग करने की तीव्र इच्छा होती है।
  • मूत्र नलिका द्वारा पेशाब शरीर से बाहर आता है। महिलाओं में पुरुषों की तुलना में मूत्रमार्ग छोटा होता है, जबकि पुरुषों में मार्ग लम्बा होता है।

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यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

यशोदा अस्पताल गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली एनसीआर में सर्वश्रेष्ठ सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में से एक है। यशोदा हॉस्पिटल का लक्ष्य सिर्फ दिल्ली एनसीआर, गाजियाबाद और नोएडा में ही नहीं बल्कि पूरे देश में सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल होने के नाते, यशोदा अस्पताल में एक ही छत के नीचे सभी समर्पित विशिष्टताएँ हैं- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सामान्य सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी और आंतरिक चिकित्सा, आर्थोपेडिक्स, मूत्रविज्ञान और कई अन्य।

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