मस्तिष्क के दर्द को न करें नज़रअंदाज़, हो सकता है स्ट्रोक

मस्तिष्क के दर्द को न करें नज़रअंदाज़, हो सकता है स्ट्रोक

स्ट्रोक, जिसे कभी-कभी मस्तिष्क का दौरा भी कहा जाता है, तब होता है जब मस्तिष्क के हिस्से में रक्त की आपूर्ति ब्लॉक हो जाती है या जब मस्तिष्क में एक रक्त वाहिका फट जाती है। इससे मस्तिष्क के ऊतकों में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और फिर कुछ मिनटों के भीतर, मस्तिष्क की कोशिकाएं मरना शुरू हो जाती हैं। इन दोनों मामलों में मस्तिष्क के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं या मर जाते हैं। स्ट्रोक से स्थायी मस्तिष्क क्षति, दीर्घकालिक विकलांगता, या यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है। स्ट्रोक एक चिकित्सकीय आपातकालीन स्थिति है, जिसमें तत्काल उपचार महत्वपूर्ण है। तत्काल उपचार व प्रारंभिक कार्रवाई मस्तिष्क क्षति और संभावित जटिलताओं को कम कर सकती है।

स्ट्रोक के प्रकार

  1. क्षणिक इस्कीमिक अटैक
    डॉक्टर एक क्षणिक इस्कीमिक अटैक (टीआईए) को एक चेतावनी या मिनिस्टस्ट्रोक भी कहते हैं। खून का एक थक्का आपके मस्तिष्क में अस्थायी रूप से रक्त प्रवाह को ब्लॉक कर देता है जिससे टीआईए होता है। खून के थक्के और टीआईए के लक्षण थोड़े समय के लिए रहते हैं।
  2. इस्केमिक स्ट्रोक
    ऐसा अनुमान है कि 87 प्रतिशत स्ट्रोक इस्केमिक होते हैं। इस्केमिक स्ट्रोक तब होता है जब एक रक्त का थक्का आपके मष्तिष्क में खून के प्रवाह व आपूर्ति को रोकता है। खून का थक्का अक्सर एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण होता है, जो कि रक्त वाहिका के अंदरूनी परत पर फैटी व वसायुक्त जमावों की वजह से होता है। इन फैटी व वसायुक्त जमावों का एक हिस्सा आपके मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को रोक सकता है। यह स्थिति दिल के दौरे के समान है, जहां रक्त के थक्के आपके हृदय के हिस्सों में रक्त के प्रवाह को रोकते हैं।
  3. रक्तस्रावी स्ट्रोक- जब आपके मस्तिष्क में रक्त वाहिका टूट जाती है तो रक्त आसपास के ऊतकों में फैलने लगता है इस स्थिति को रक्तस्रावी स्ट्रोक कहते हैं। रक्तस्रावी स्ट्रोक के दो प्रकार हैं: पहला, एन्यूरिज्म है, जिसमे कमजोर रक्त वाहिका का एक हिस्सा बाहर की ओर फूल या सूज जाता है और कभी-कभी टूट या फट भी जाता है। दूसरा, आर्टिरियोवेनस मैलफॉर्मेशन है, जिसमें असामान्य रूप से बनी हुई रक्त वाहिकाएं आती हैं। अगर इस तरह की रक्त वाहिकाएं टूट जाती हैं, तो इससे रक्तस्रावी स्ट्रोक हो सकता है।

इलाज

  1. क्षणिक इस्कीमिक अटैक (टीआईए)
    टीआईए के उपचार में ऐसी दवाइयां शामिल हैं जो भविष्य में स्ट्रोक को रोकने में मदद करती हैं। इन दवाओं में एंटीप्लेटलेट्स और एंटीकोआगुलंट्स शामिल हैं। एंटीप्लेटलेट्स आपके प्लेटलेट नामक खून के घटक के आपस में चिपकने की व थक्का बनाने की संभावना को कम करता है। एस्पिरिन (बफ़रिन) और क्लॉपिडोग्रेल (प्लाविक्स) एंटीप्लेटलेट्स दवाएं हैं। एंटीकोआगुलंट्स, ऐसी दवाएं हैं जो प्रोटीन को बनने से रोकती हैं जो थक्के जमाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन दवाओं के कई अलग-अलग प्रकार मौजूद हैं, जिनमें वारफेरिन (कौमडिन) और दाबीगट्रान (पेरडाक्सा) शामिल हैं।
  2. इस्कीमिक आघात
    आपका इस्केमिक उपचार इस पर निर्भर करता है की आप कितने जल्दी अस्पताल जाते हैं। यह आपके व्यक्तिगत चिकित्सा इतिहास पर भी निर्भर करता है। यदि आप स्ट्रोक के तीन घंटे के भीतर अपने चिकित्सक के पास पहुंच जाते हैं तो आपका डॉक्टर आपको ऊतक प्लास्मिनोज़ उत्प्रेरक (टीपीए) के रूप में जानी जाने वाली दवा दे सकता है। यह दवा, जो एक IV के माध्यम से वितरित की जाती है, वह थक्के को मिटा सकती है। हालांकि, खून बहने के जोखिम के कारण सभी लोग टीपीए नहीं प्राप्त कर सकते हैं। आपके चिकित्सक को टीपीए के द्वारा उपचार करने से पहले अपने मेडिकल इतिहास पर सावधानी से विचार करना होगा। डॉक्टर आपके मस्तिष्क से थक्के को शारीरिक रूप से निकाल सकता है या थक्के को ख़त्म करने के लिए दवाइयां दे सकता है। ये उपचार हमेशा फायदेमंद नहीं होते हैं, क्योंकि आपके मेडिकल इतिहास के कारण आपको कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।
  3. रक्तस्रावी स्ट्रोक
    रक्तस्रावी स्ट्रोक के उपचार में मस्तिष्क में हो रहे रक्तस्राव को रोकना शामिल है और मस्तिष्क में रक्तस्राव से जुड़े दुष्प्रभावों को कम करना शामिल है। साइड इफेक्ट्स के रूप में बढ़ा हुआ आंतरकपालीय दबाव हो सकता है। सर्जिकल प्रक्रियाओं में सर्जिकल क्लिपिंग या कोयलिंग शामिल है। ये रक्त वाहिका से और अधिक खून बहने से रोकने के लिए बनाये गायें हैं। इंट्राक्रानियल दबाव को कम करने के लिए आपको दवाएं दी जा सकती हैं। रक्तस्राव को रोकने के लिए आपके मस्तिष्क में रक्त के थक्के की मात्रा बढ़ाई जाती है जिसके लिए रक्ताधान या खून के संचरण की प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है।

स्ट्रोक से होने वाली जटिलतायें-

  • स्ट्रोक अवसाद या चिंता का कारण हो सकता है। आपको अपने व्यवहार में बदलाव का अनुभव भी हो सकता है, जैसे कि दूसरों के साथ सामाजिक होने में परेशानी आना व आवेगी होना।
  • स्ट्रोक आपके मस्तिष्क के उन क्षेत्रों पर दुष्प्रभाव डालता है जो बोलने व निगलने से सम्बंधित होते हैं। नतीजतन, आपको बोलने, पढ़ने या दूसरे लोगो को समझने में परेशानी हो सकती है।
  • स्ट्रोक आपके शरीर के कुछ हिस्सों स्तब्ध होने जैसी स्थिति पैदा कर सकता है और यह दर्दनाक हो सकता है। कभी-कभी मस्तिष्क की चोटें तापमान को समझने की आपकी क्षमता को भी प्रभावित कर सकती हैं। इस स्थिति को केंद्रीय स्ट्रोक दर्द के रूप में जाना जाता है और इसका इलाज मुश्किल हो सकता है।
  • आपके मस्तिष्क के दाहिने हिस्से में स्ट्रोक होने से आपका बायां अंग प्रभावित हो सकता है और ऐसे ही बाएं मस्तिष्क में स्ट्रोक होने से दायां अंग। जिन लोगों ने स्ट्रोक का सामना किया है, वे चेहरे की मांसपेशियों का उपयोग नहीं कर सकते हैं या हाथों की गतिविधि में दिक्कत हो सकती है।
  • पुनः प्रतिष्ठा या बहाली के माध्यम से स्ट्रोक के बाद आप अपने शारीरिक गतिविधियों को दोबारा पा सकते हैं, बोलने, या निगलने की क्षमता दोबारा हासिल कर सकते हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया में समय लग सकता है।

स्ट्रोक जैसे गंभीर मस्तिष्क रोग के समय पर निदान और सही इलाज के लिए यशोदा हॉस्पिटल में विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्ट से तुरंत परामर्श लें, जहाँ उन्नत तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों की टीम द्वारा प्रभावी उपचार उपलब्ध है।

यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

यशोदा अस्पताल गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली एनसीआर में सर्वश्रेष्ठ सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में से एक है। यशोदा हॉस्पिटल का लक्ष्य सिर्फ दिल्ली एनसीआर, गाजियाबाद और नोएडा में ही नहीं बल्कि पूरे देश में सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल होने के नाते, यशोदा अस्पताल में एक ही छत के नीचे सभी समर्पित विशिष्टताएँ हैं- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सामान्य सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी और आंतरिक चिकित्सा, आर्थोपेडिक्स, मूत्रविज्ञान और कई अन्य।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *