जाने पीसीओडी से जुड़ी सभी जरूरी बातें
लगातार बिगड़ती लाइफस्टाइल की वजह से इन दिनों लोग कई तरह की समस्याओं का शिकार होते जा रहे हैं। आपके आसपास आपको ऐसे कई लोग मिलेंगे, जो मोटापा, डायबिटीज, बीपी जैसी समस्याओं से परेशान हैं। वहीं, महिलाएं भी इन दिनों अपनी जीवनशैली और गलत खानपान की वजह से एक गंभीर समस्या का शिकार हो रही हैं। जिसमें से पीसीओडी महिलाओं में होने वाली एक ऐसी बीमारी है, जिसकी वजह से उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज महिलाओं में होने वाली एक गंभीर समस्या है, जिसमें महिलाओं की ओवरी में बहुत सारे एग रिलीज होते हैं। इसकी वजह से उनकी ओवरी फूलने लगती है। इस बीमारी की वजह से उन्हें पीरियड्स नहीं आते और पेट में लगातार दर्द बना रहता है। साथ ही इस बीमारी में हॉर्मोन्स असंतुलित होने की वजह से अक्सर मूड स्विंग भी होते रहते हैं।
पीसीओडी की समस्या उन महिलाओं में अधिक देखने को मिल रही है, जो नाइट शिफ्ट में काम करती हैं। पूरी रात जागना देर रात खाना जैसी जीवनशैली उनकी सेहत को भारी नुकसान पहुंचा रही है। क्योंकि इस तरह के नियमित रूप से जैविक चक्र में गड़बड़ी हो जाती है। जो इस दिक्कत को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती है।
पीसीओडी के प्रकार
- इंसुलिन प्रतिरोध पीसीओडी – जब इंसुलिन का स्तर प्रभावित होने लगता है और शरीर में ब्लड शुगर असंतुलित हो जाता है तो इस स्थिति में ओव्यूलेशन की प्रक्रिया इंसुलिन के द्वारा प्रभावित होती है।
- रोग प्रतिरोधक संबंधित पीसीओडी – रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कम होने पर शरीर में ऑटो-एंटीबॉडीज का जन्म होता है, जो प्रोटीन के खिलाफ काम करता है। इससे महिलाओं में पीसीओडी की समस्या हो सकती है। इनके अलावा पीसीओडी के प्रकार टाइप-1, टाइप-2 और टाइप3 भी होते हैं।
लक्षण
- चेहरे और शरीर पर दाने होना
- पीरियड्स का वक्त बदलना
- चेहरे पर बाल आना
- पेट में दर्द होना
- वजन बढ़ना
- सिर दर्द होना
- डार्क पैच होना
- बालों का तेजी से झड़ना
कारण
पीसीओडी समस्या के कई कारण हो सकतें हैं। जिनमें से कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित है- - प्राकृतिक रूप से महिलाओं के शरीर में उत्तेजक और निरोधक हार्मोन होते हैं जो मासिक धर्म नियंत्रित करते हैं। पीसीओडी में इन हार्मोनों में असंतुलन होता है, जिससे अंडाशय में गोलियां बनती हैं और मासिक धर्म अनियमित हो जाते हैं।
- अनियमित खान-पान, नियमित व्यायाम न करना, रोजमर्रा की तनावपूर्ण जिंदगी, अत्यधिक तनाव और नींद की कमी जैसी विभिन्न जीवन शैली से संबंधित तत्व पीसीओडी में असंतुलन को बढ़ावा देते हैं। वजन का बढ़ जाना भी पीसीओडी को बढ़ावा दे सकता है।
- असंतुलित खान-पान और खुराक के कारण पीसीओडी होने की संभावना बढ़ जाती है। जब आप बेहतर खान-पान करते हैं, तो इससे हार्मोन्स पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- अत्यधिक तनाव भी इस समस्या का मुख्य कारण हो सकता है।
- थायराइड रोग और डायबिटीज जैसी समस्याएं भी पीसीओडी को बढ़ावा देती हैं।
शरीर पर पीसीओडी का असर - पीसीओडी की समस्या होने पर महिलाओं को गर्भधारण करने में तो दिक्कत आती है। साथ ही वे हॉर्मोनल इंबैलंस के कारण भावनात्मक रूप से बहुत अधिक उथल-पुथल का सामना करती हैं।
- इस बीमारी में वेट तेजी से बढ़ने लगता है जबकि कुछ महिलाओं को हर समय कमजोरी की शिकायत रहती है।
- पीरियड्स में किसी को कम ब्लीडिंग होती है तो किसी को बहुत अधिक ब्लीडिंग होती है।
बचाव - आपको अपनी जीवनशैली को इस तरह संतुलित करना होगा कि हॉर्मोन्स का सीक्रेशन सही तरीके से हो सके।
- आप अपनी डायट का ध्यान रखें और मौसम के अनुसार ही खान-पान अपनाएं।
- प्रकृति के साथ जुड़ें। यानी वॉक, रनिंग करें और पार्क में टहलें। रोज एक्सर्साइज करें।
- खूब पानी पिएं और अच्छी किताबें पढ़ें। इससे तन और मन दोनों को शांत रखने में मदद मिलती है।
- फाइबर बेस्ड डायट लें। इसके लिए अपने खाने में सब्जियां, दालें, दलिया आदि शामिल करें।
- कोशिश करें कि आपका भोजन कम से कम तेल में बना हो। ऑइली फूड आपको नुकसान दे सकता है।
- चाय-कॉफी के जरिए कैफीन लेना बंद कर दें। ऐसा संभव ना हो तो दिन में केवल एक या दो बार ही इनका उपयोग करें। एल्कोहॉल और शुगर की मात्रा को भी बहुत सीमित कर दें।
- जंक फूड से दूरी बना लें। इसकी जगह अपनी डायट में ड्राई फ्रूट्स, नट्स, दूध, दही, छाछ, फ्रूट्स और फिश जैसी हेल्दी चीजें शामिल करें।
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