अंडाशय और गर्भाशय हटाने के साइड इफेक्ट
आजकल के भागदौड़ भरे जीवन में जहां पुरुष और महिला कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं, वही महिलाएं घर और बाहर दोनों जगह संतुलन बिठाने के चक्कर में अपने स्वस्थ को नज़रअंदाज़ करने लगती है। ऐसे में उन्हें कई तरह के रोग घेर लेते है, जिन्हें नज़रअंदाज़ करते-करते स्थिति ऐसी आ जाती है कि बात सर्जरी तक आ जाती है। इसलिए महिलाओ को बाहरी संतुलन बिठाने के साथ-साथ अपने सेहत का भी खयाल रखना चाहिए। अंडाशय और गर्भाशय महिला के प्रमुख प्रजनन अंग हैं। अंडाशय से हर महीने अंडा निकलता है, जो फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया के लिए जरूरी होता है। गर्भाशय में भ्रूण का विकास होता है। यदि महिला माँ बनना चाहती है तो यह दोनों अंग होना जरूरी हैं।
कारण
कुछ महिलाओं को मासिक धर्म चक्र के दौरान बहुत तकलीफ होती है। ऐसे में महिलाएं (जो माँ बन चुकी है) गर्भाशय या अंडाशय निकलवाने का फैसला ले लेती हैं। इसके अलावा और भी कई कारण हैं जिससे महिला यह कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाती है। जैसे गर्भाशय का कैंसर, फाइब्रॉइड्स, एंडोमेट्रियोसिस इत्यादि।
गर्भाशय और अंडाशय हटाने से पहले का परीक्षण
सर्जरी से पहले कुछ परीक्षण किए जाते हैं। परीक्षण से ही निर्धारित होता है कि सर्जन गर्भाशय हटाने के लिए किस प्रक्रिया का चयन करेंगे। यह परीक्षण हैं:
- पैप स्मीयर टेस्ट
- एंडोमेट्रियल बायोप्सी
- पेल्विक अल्ट्रासाउंड
गर्भाशय और अंडाशय को हटाया की प्रक्रिया - गर्भाशय को हटाने के लिए जो सर्जरी की जाती है उसे हिस्टरेक्टमी कहते हैं। इस सर्जरी की मदद से गर्भाशय के अलावा फैलोपियन ट्यूब, सर्विक्स और अंडाशय को भी निकाला जा सकता है।
- हिस्टरेक्टमी पेट या योनि के माध्यम से की जा सकती है। इसकी दो मुख्य प्रक्रिया हैं- लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक (रोबोटिक टूल्स की सहायता से)। आमतौर पर प्रक्रिया का चयन सर्जन करते हैं, मगर प्रक्रिया गर्भाशय निकलने के बाद होने वाले साइड इफेक्ट्स से सीधा संबंध रखती है।
- अंडाशय हटाने के लिए मुख्य रूप से जिस सर्जिकल प्रोसेस को अंजाम दिया जाता है उसे डिम्बाशय-उच्छेदन कहते हैं।
गर्भाशय हटाने के साइड इफेक्ट्स
- फिजिकल साइड इफेक्ट्स
- रिकवरी पीरियड के दौरान महिला योनि से रक्तस्त्राव देख सकती है। हालांकि, यह लगभग 5 से 7 दिनों तक होता है। इस दौरान महिला सेनेटरी पैड्स का इस्तेमाल कर सकती है।
- गर्भाशय हटाने की सर्जरी के बाद श्रोणि क्षेत्र या चीरे के पास सूजन और जलन की समस्या हो सकती है। कुछ महिलाओं में खुजली, सुन्न होना, और टांके की आस-पास की स्किन लाल हो सकती है।
- भले ही ओवरी को न हटाया गया हो, गर्भाशय हटने के बाद महिला जल्द ही मेनोपाज की अवस्था में प्रवेश कर जाती है। अगर शरीर से गर्भाशय बस निकाला गया है और अंडाशय को छोड़ दिया गया है तो पीरियड साइकिल जारी रहता है। महिला ब्लीड नहीं करती है, लेकिन प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम के लक्षण नजर आ सकते हैं।
2. पेल्विक अंगो का प्रोलैप्स होना
- गर्भाशय हटाने की सर्जरी के बाद श्रोणि क्षेत्र के अंग अपनी जगह से आगे बढ़ सकते हैं। सर्जरी के बाद तीन साल तक पेल्विक अंगों के प्रोलैप्स होने का खतरा लगभग 1% रहता है। वजाइनल प्रोलैप्स का खतरा अधिक रहता है।
- सर्जरी के बाद भी एनेस्थीसिया का प्रभाव रहता है जिससे आपको चक्कर आना, ठंड लगना, थरथराना, खुजली, सिर दर्द, और पेशाब करने में समस्या हो सकती है।
- गर्भाशय हटाने की सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान अगर स्फिंकटर मांसपेशियों में चोट लग गई तो इससे पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन हो सकता है। महिला पेल्विक मांसपेशियों पर से अपना नियंत्रण खो सकती है जिससे कब्ज, मल त्याग के दौरान खिंचाव और दर्द, आंत में इन्फेक्शन हो सकता है। गर्भाशय हटाने का यह लॉन्ग टर्म साइड इफेक्ट है।
3. इमोशनल साइड इफेक्ट्स
- गर्भाशय प्रत्येक महिला के माँ बनने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। गर्भाशय का हटना मतलब आप इसके बाद कभी माँ नहीं बन सकती हैं।
- इसके बाद आपके पीरियड्स भी बंद हो जाएँगे। यह आपको थोड़ी उत्साहित कर सकता है, लेकिन एक छोर पर आपकी मातृत्व खत्म हो जाती है जो आपके भीतर उदास भावना उत्पन्न करती है। यह आपको डिप्रेशन की ओर ले जा सकता है।
- अगर महिला माँ बन चुकी है और खुश है, तो शायद सर्जरी के पश्चात उसे कोई इमोशनल कष्ट न हो। अगर आपकी उम्र कम है, और माँ का सुख भोगना बाकी है तो बेवजह गर्भाशय हटवाने से पहले आपको अवश्य सोचना चाहिए।
अंडाशय हटाने के साइड इफेक्ट - अंडाशय हटवाने के बाद अगर आपकी ब्लीडिंग नहीं रुकती है, तो आपको खून चढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है।
- ओवरी रिमूवल सर्जरी के बाद हफ़्तों तक संक्रमण रह सकता है। इससे तेज बुखार, चीरे के पास सूजन और दर्द की समस्या हो सकती है।
- कई बार प्रभावित क्षेत्र के पास की मांसपेशी कमजोर हो जाती है और हर्निया का खतरा बढ़ जाता है।
- महिला के ब्लैडर या आंत को क्षति पहुँच सकती है। नतीजन पेशाब और मल त्याग में दिक्कत हो सकती है। हालांकि यह बहुत कम लोगों में होता है।
- अगर दोनों अंडाशय निकाल दिए गए हैं तो महिला सामन्य रूप से प्रजनन नहीं कर सकती है। महिला को गर्भवती होने के लिए सयाहक प्रजनन तकनीक का सहारा लेना पड़ता है।
- डिम्बाशय उच्छेदन की प्रक्रिया के बाद कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। इससे हृदय रोग भी हो सकता है।
- गर्भाशय और अंडाशय दोनों को हटवाने के बाद महिला को योनि में सूखापन, हॉट फ्लैश, रात में पसीना आना और इंसोम्निया की शिकायत हो सकती है। यह मेनोपॉज की शुरुआत के लक्षण भी हैं।
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