क्या स्तन प्रत्यारोपण भविष्य में कैंसर का कारण बन सकता है?

क्या स्तन प्रत्यारोपण भविष्य में कैंसर का कारण बन सकता है?

स्तन प्रत्यारोपण करवाने से आमतौर पर स्तन कैंसर होने का जोखिम नहीं बढ़ता, लेकिन कुछ प्रकार के स्तन प्रत्यारोपण के मामलों में दुर्लभ कैंसर का खतरा हो सकता है। इस बारे में अभी तक अधिक शोध किया जा रहा है, लेकिन कुछ जानकारी उपलब्ध है जो महत्वपूर्ण हो सकती है। स्तन प्रत्यारोपण का सीधा संबंध स्तन कैंसर के बढ़ते जोखिम से नहीं पाया गया है। जिन महिलाओं ने स्तन प्रत्यारोपण करवाया है, उनमें स्तन कैंसर की संभावना उन्हीं महिलाओं जितनी होती है जिन्होंने प्रत्यारोपण नहीं करवाया है। प्रत्यारोपण से स्तन की कोशिकाओं पर कैंसर के विकास का कोई प्रमाणित प्रभाव नहीं होता है।
हालाँकि, स्तन प्रत्यारोपण से जुड़े मामलों में एक दुर्लभ कैंसर, ब्रेस्ट इम्प्लांट एसोसिएटेड एनाप्लास्टिक लार्ज सेल लिंफोमा का खतरा हो सकता है। इससे स्तन के अंदर नहीं, बल्कि प्रत्यारोपण के चारों ओर बनने वाले ऊतकों (कैप्सूल) में विकसित होता है। यह एक प्रकार का लिंफोमा है, यानी यह स्तन के भीतर की कोशिकाओं से नहीं, बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं से संबंधित होता है। ब्रेस्ट इम्प्लांट एसोसिएटेड एनाप्लास्टिक लार्ज सेल लिंफोमा की संभावना विशेष रूप से बनावट वाले (टेक्सचर्ड) प्रत्यारोपण के मामलों में पाई गई है।

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स्तन प्रत्यारोपण आमतौर पर सौंदर्य या पुनर्निर्माण के उद्देश्यों से किया जाता है, जैसे कि स्तन कैंसर के इलाज के बाद पुनर्निर्माण करना या स्तनों का आकार बढ़ाना। ज्यादातर मामलों में, स्तन प्रत्यारोपण से सीधे स्तन कैंसर का खतरा बढ़ता हुआ नहीं पाया गया है। हालांकि, एक प्रकार का दुर्लभ कैंसर जिसे “ब्रेस्ट इम्प्लांट-एसोसिएटेड एनेप्लास्टिक लार्ज सेल लिम्फोमा” कहा जाता है, स्तन प्रत्यारोपण से जुड़ा पाया गया है। यह कैंसर स्तन के ऊतक में नहीं होता बल्कि प्रत्यारोपण के चारों ओर की कैप्सुलर ऊतक में होता है।
लक्षण
ब्रेस्ट इम्प्लांट एसोसिएटेड एनाप्लास्टिक लार्ज सेल लिंफोमा के सामान्य लक्षणों में प्रत्यारोपण के आस-पास सूजन, दर्द, गांठ, या तरल पदार्थ का जमाव शामिल हो सकता है। यदि प्रत्यारोपण के बाद कई वर्षों के बाद भी इस तरह के लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
बचाव
यदि आपने स्तन प्रत्यारोपण कराए हैं या कराना चाहती हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि आप इसके संभावित जोखिमों को समझें और नियमित रूप से जाँच कराती रहें।

  • यदि आप स्तन प्रत्यारोपण करवाने का विचार कर रही हैं, तो अपने डॉक्टर से इसके विभिन्न प्रकारों के बारे में पूरी जानकारी लें। स्मूथ-सरफेस प्रत्यारोपण बनावट वाले प्रत्यारोपण की तुलना में कम जोखिम रखते हैं।
  • प्रत्यारोपण के बाद नियमित रूप से स्तन की जाँच करवाना और कोई भी असामान्य लक्षण होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
  • डॉक्टर से नियमित रूप से इम्प्लांट की स्थिति की जाँच कराएं। MRI या अल्ट्रासाउंड की सहायता से प्रत्यारोपण की स्थिति और आसपास के ऊतकों का निरीक्षण किया जा सकता है।
  • किसी भी असामान्य सूजन, दर्द या जलन का अनुभव होने पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
  • ब्रेस्ट इम्प्लांट कराने से पहले पूरी जानकारी हासिल करें और सर्जन से इम्प्लांट के प्रकार, उसकी विशेषताओं और उससे जुड़ी सभी जानकारियाँ प्राप्त करें।

    इम्प्लांट्स और स्तन कैंसर की जाँच
    स्तन प्रत्यारोपण होने पर मैमोग्राफी से स्तन कैंसर की पहचान करना थोड़ा कठिन हो सकता है। इम्प्लांट्स एक्स-रे के जरिए स्तन के कुछ हिस्सों को छुपा सकते हैं, जिससे ट्यूमर या गांठ की पहचान मुश्किल हो सकती है। हालांकि, मैमोग्राफी तकनीकों में सुधार के कारण अब इम्प्लांट वाले स्तनों की मैमोग्राफी करने के लिए विशेष तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि इम्प्लांट-डिस्प्लेसमेंट व्यू, जिसमें इम्प्लांट को दबाव डालकर स्तन के ऊतक की जाँच की जाती है।
    स्तन प्रत्यारोपण करवाने के बाद, मैमोग्राफी के दौरान स्क्रीनिंग थोड़ी मुश्किल हो सकती है क्योंकि प्रत्यारोपण से स्तन के कुछ हिस्से छिप सकते हैं। हालांकि, इस स्थिति में डॉक्टर अन्य स्क्रीनिंग तकनीकों जैसे अल्ट्रासाउंड या MRI का उपयोग भी कर सकते हैं ताकि किसी भी तरह की समस्या का जल्दी पता लगाया जा सके। स्तन प्रत्यारोपण का सीधा संबंध स्तन कैंसर से नहीं है, लेकिन बनावट वाले प्रत्यारोपण में ब्रेस्ट इम्प्लांट एसोसिएटेड एनाप्लास्टिक लार्ज सेल लिंफोमा का दुर्लभ खतरा हो सकता है। अपने डॉक्टर से इस बारे में विस्तृत जानकारी लेकर सही निर्णय लेना आवश्यक है। स्तन प्रत्यारोपण करवाने के बाद नियमित स्क्रीनिंग और किसी भी असामान्य लक्षण की पहचान से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को कम किया जा सकता है।
    स्तन प्रत्यारोपण और स्तन कैंसर का सीधा संबंध नहीं पाया गया है, लेकिन BIA-ALCL जैसे दुर्लभ प्रकार के कैंसर का मामूली जोखिम है। यदि आप स्तन प्रत्यारोपण कराना चाहती हैं, तो इसके सभी पहलुओं पर जानकारी प्राप्त करना और नियमित चिकित्सा जाँच करवाना आवश्यक है। अपने डॉक्टर से सलाह लें और सुरक्षित विकल्पों पर विचार करें। इस प्रकार, सही जानकारी और सावधानियों के साथ आप एक स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जी सकती हैं।
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यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

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यशोदा अस्पताल गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली एनसीआर में सर्वश्रेष्ठ सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में से एक है। यशोदा हॉस्पिटल का लक्ष्य सिर्फ दिल्ली एनसीआर, गाजियाबाद और नोएडा में ही नहीं बल्कि पूरे देश में सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल होने के नाते, यशोदा अस्पताल में एक ही छत के नीचे सभी समर्पित विशिष्टताएँ हैं- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सामान्य सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी और आंतरिक चिकित्सा, आर्थोपेडिक्स, मूत्रविज्ञान और कई अन्य।

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