बोन मैरो(Bone Marrow) कैंसर के सावधानी बरतनी है जरूरी
भारत में हर साल 3000 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट प्रक्रियाएं की जा रही हैं, इसके बाद भी कई मरीज लाइन में इंतजार करते रहते हैं। आवश्यकता और वास्तविक बीएमटी प्रक्रियाओं के बीच के अंतर का कारण जागरूकता, बुनियादी सुविधाओं, सुविधाओं और अच्छे डॉक्टरों की कमी है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट प्रक्रिया ब्लड कैंसर, थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, इम्यून में गड़बड़ी, अप्लास्टिक एनीमिया, कुछ ऑटो इम्यून डिसॉडर जैसी समस्याओं का इलाज करने में अत्यधिक प्रभावी है। अब यह तकनीक ब्रेन ट्यूमर, न्यूरो बैस्टोमा और सरकोमा के लिए भी इस्तेमाल की जाने लगी है।
बोन मैरो यानि अस्थि मज्जा क्या है?
अधिकांश लोग इस समस्या से परिचित नहीं होने के कारण वे इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, इसलिए लोगों को इस समस्या के बारे में जागरुक करना बहुत जरूरी है। बोन मैरो यानि अस्थि मज्जा मुख्य हड्डियों के बीच में एक मुलायम व स्पॉंजी टिशू है। इसमें रक्त बनाने वाली अपरिपक्व कोशिकाएं होती हैं जिन्हें स्टेम सेल्स कहते हैं। स्टेम सेल्स लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद कोशिकाएं और प्लेटलेट्स में विकसित होती हैं। बोन कैंसर तब होता है, जब आपकी हड्डियों में सामान्य कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। यह सामान्य हड्डी के ट्यूमर को नष्ट कर देता है। इसका मतलब है कि यह आक्रामक रूप से बढ़ रहा है और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल रहा है। इस ट्यूमर को अक्सर कैंसर के रूप में जाना जाता है। यह हड्डियों में शुरू होने वाला दुर्लभ कैंसर है। यह शरीर की किसी भी हड्डी में शुरू हो सकता है, लेकिन यह आमतौर पर पेल्विस या हाथ-पैरों की लंबी हड्डियों को प्रभावित करता है। कुछ प्रकार के बोन कैंसर बच्चों पर असर डालते हैं, जबकि ज्यादातर वयस्कों को प्रभावित करते हैं। सर्जिकल रिमूवल इसका सबसे आम उपचार है, लेकिन कीमो और रेडियोथैरेपी का भी उपयोग किया जा सकता है।
लक्षण
आंवला का सेवन भी कैंसर के इलाज और रोकथाम में बहुत मददगार है। आंवला में ऐसे गुण होते हैं जो आपके शरीर को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में मदद करते हैं।
हड्डियों में दर्द को अक्सर छोटी-मोटी समस्या समझकर अनदेखा कर दिया जाता है। हालांकि अगर ये दर्द कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहा है, तो यह बोन कैंसर का संकेत हो सकता है।
शरीर के किसी भी हिस्से में अलग तरह की गांठ या सूजन होना सामान्य नहीं है। इसे नजरअंदाज भी नहीं किया जाना चाहिए। कुछ तरह की सूजन समय के साथ कम हो जाती है, लेकिन बोन कैंसर के मामले में सूजन वहां भी आ सकती है, जहां दर्द महसूस होता है।
कमजोर हड्डियों चोटों के जोखिम को बढ़ा सकती है, जिससे फ्रेक्चर तक हो सकता है। हड्डियों का कैंसर हड्डियों को कमजोर करता है, जो बार-बार फ्रेक्चर का कारण बनता है।
सुन्नमन और झुनझुनी का अनुभव तब होता है, जब नसों को कोई नुकसान हुआ हो। बोन कैंसर के मामले में ट्यूमर के बढ़ने से नसों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। जिसके कारण सुन्नपन महसूस हो सकता है।
वैसे तो जोड़ों में अकड़न एक समय के साथ कम हो जाती है। फिर भी यह ऐसी स्थिति है, जो बोन कैंसर का संकेत देती है। बेहतर है कि इसे अनदेखा न करें। यदि सही समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह आपके मूवमेंट्स को भी प्रतिबंधित कर सकता है।
इलाज/उपचार
कीमोथेरेपी — बोन मैरो कैंसर के इलाज में सबसे पहले कीमोथेरेपी प्राथमिक उपचार के लिए अपनाई जाती हैं। कीमोथेरेपी के दौरान दवाएं दी जाती हैं जो कि कैंसर सेल्स को नष्ट करती हैं। यह दवाएं खाने के लिए या फिर नसों में दी जाती है। कैंसर के इलाज के लिए आमतौर पर कुछ दवाएं मशहूर हैं जो कि डॉक्टर की सलाह पर दी जाती हैं।
रेडिएशन थेरेपी — इस प्रक्रिया के द्वारा कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए विकिरण चिकित्सा दी जाती है। इस थेरपी से जल्दी ही कैंसर के सेल्स मर जाते हैं और मरीज जल्दी ही ठीक होने लगता हैं।
रेडियो इम्यून थेरेपी — इस थेरपी के माध्यम से सिर्फ ट्यूमर को नष्ट करने का प्रयास किया जाता है जिससे हेल्दी सेल्स बच जाते हैं और ट्यूमर से प्रभावित सेल खत्म हो जाते हैं।
शल्य चिकित्सा — सर्जरी से कई बार बोन कैंसर का उपचार करना पड़ता है। इसके लिए यदि बोन कैंसर बहुत फैल गया है और रोगी को कई तरह की समस्याएं हो रही हैं। या फिर बोन कैंसर किसी जोड़ के आसपास है तो इस स्थिति में शल्स चिकित्सा की जरूरत पड़ती है। कई बार जब मरीज गंभीर स्थिति में होता है तो भी सुरक्षा की दृष्टि से शल्य चिकित्सा से बोन कैंसर का ईलाज किया जाता है।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट — बोन मैरो कैंसर के इलाज के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट थेरेपी भी अपनाई जाती हैं। हालांकि यह बहुत ही जटिल प्रणाली हैं। लेकिन इस उपचार के जरिए संक्रमित बोन मैरो को स्वस्थ बोन मैरो से बदल दिया जाता है। जिससे मरीज पहले से कहीं अधिक स्वस्थ महसूस करता है और प्रभावित कोशिकाओं के बदले स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण होने लगता हैं। जो कि बोन मैरो कैंसर से लड़ने के लिए प्रयासरत होती हैं। हालांकि बोन मैरो कैंसर का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा की मदद से भी किया जा सकता है। इसके साथ ही मरीज को डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए और अपने खानपान पर खास ध्यान देना चाहिए।
घरेलु उपचार
अदरक का अर्क कैंसर से होने वाले दर्द और सूजन से राहत दिलाने में बहुत मददगार होता है। यह शरीर में प्रोस्टाग्लैंडीन तत्वों की संख्या को कम करता है और दर्द पैदा करने वाले अणुओं को शांत करता है।
हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसका समय पर सेवन दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है और कैंसर कोशिकाओं को भी नष्ट करता है।
अश्वगंधा में एंटी-इंफ्लेमेटरी और न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण होते हैं। अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक जड़ीबूटी है जो सूजन को कम करने और शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में मदद कर सकती है। यह कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोककर कैंसर के उपचार में मदद करता है।
