कीमोथेरेपी क्या होती है?

कीमोथेरेपी क्या होती है?
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कीमोथेरेपी की प्रक्रिया, फायदे, साइड इफेक्ट और आवश्यक सावधानियां

कैंसर के उपचार की चर्चा होते ही सबसे पहले जिस उपचार का नाम मन में आता है, वह है कीमोथेरेपी (Chemotherapy)। दुर्भाग्य से इसके बारे में समाज में अनेक भ्रांतियां भी प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे अत्यधिक कष्टदायक उपचार मानते हैं, तो कुछ इसे केवल अंतिम अवस्था के रोगियों के लिए आवश्यक समझते हैं। जबकि वास्तविकता इससे कहीं अलग है।

कीमोथेरेपी आधुनिक कैंसर चिकित्सा की सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावी उपचार पद्धतियों में से एक है। आज विश्वभर में लाखों रोगियों का सफल उपचार इसी विधि से किया जा रहा है। अनेक प्रकार के कैंसरों में यह रोग को नियंत्रित करने, उसके फैलाव को रोकने तथा कई मामलों में पूर्णतः समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कीमोथेरेपी क्या है?

कीमोथेरेपी एक ऐसी उपचार पद्धति है जिसमें विशेष कैंसररोधी दवाओं (Anti-Cancer Drugs) का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है या उनकी वृद्धि एवं विभाजन को रोका जाता है।

चूंकि कैंसर कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती और विभाजित होती हैं, इसलिए ये दवाएं मुख्य रूप से उन्हीं पर प्रभाव डालने का प्रयास करती हैं।

हालांकि शरीर की कुछ सामान्य कोशिकाएं जैसे बालों की जड़ों, मुंह की परत, पाचन तंत्र तथा अस्थि मज्जा (Bone Marrow) की कोशिकाएं भी तेजी से विभाजित होती हैं। इसलिए कुछ दुष्प्रभाव दिखाई दे सकते हैं, जो अधिकांश मामलों में अस्थायी होते हैं और उपचार पूरा होने के बाद धीरे-धीरे कम हो जाते हैं।

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कीमोथेरेपी कैसे दी जाती है?

कीमोथेरेपी केवल एक ही तरीके से नहीं दी जाती। रोगी की स्थिति, कैंसर के प्रकार और प्रयुक्त दवा के अनुसार इसे विभिन्न रूपों में दिया जा सकता है—

  • नस (IV) के माध्यम से ड्रिप द्वारा
  • इंजेक्शन के रूप में
  • कैप्सूल या गोलियों के रूप में
  • कुछ विशेष परिस्थितियों में सीधे शरीर के किसी विशेष भाग में

कीमोथेरेपी सामान्यतः साइकिल (Cycles) में दी जाती है। एक साइकिल के बाद कुछ दिनों या सप्ताह का अंतर रखा जाता है ताकि शरीर की सामान्य कोशिकाएं स्वयं को पुनः स्वस्थ कर सकें।

कितनी साइकिलें दी जाएंगी, यह कैंसर के प्रकार, उसकी अवस्था और रोगी की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है।

कीमोथेरेपी कब की जानी चाहिए?

हर रोगी में कीमोथेरेपी का उद्देश्य अलग हो सकता है।

1. सर्जरी के पहले (Neoadjuvant Chemotherapy)

यदि ट्यूमर का आकार बड़ा हो, तो सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी देकर उसे छोटा किया जाता है, जिससे ऑपरेशन अधिक सफल हो सके।

2. सर्जरी के पश्चात (Adjuvant Chemotherapy)

सर्जरी के बाद यदि शरीर में सूक्ष्म कैंसर कोशिकाएं बच जाने की आशंका हो, तो उन्हें नष्ट करने और कैंसर की पुनरावृत्ति (Recurrence) का जोखिम कम करने के लिए कीमोथेरेपी दी जाती है।

3. मुख्य उपचार के रूप में

कुछ प्रकार के कैंसर, विशेषकर रक्त संबंधी कैंसरों में कीमोथेरेपी ही प्रमुख उपचार होती है।

4. फैले हुए कैंसर में

यदि कैंसर शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका हो, तो कीमोथेरेपी रोग को नियंत्रित करने, लक्षणों को कम करने तथा रोगी के जीवन की गुणवत्ता और अवधि में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कीमोथेरेपी से होने वाले प्रमुख लाभ

कीमोथेरेपी के अनेक महत्वपूर्ण लाभ हैं, जैसे—

  • यह पूरे शरीर में पहुंचकर कैंसर कोशिकाओं पर प्रभाव डालती है।
  • शरीर में फैली हुई सूक्ष्म कैंसर कोशिकाओं को भी नष्ट करने में सहायक होती है।
  • ट्यूमर का आकार कम करती है।
  • सर्जरी और रेडियोथेरेपी की सफलता बढ़ाने में मदद करती है।
  • कई प्रकार के कैंसरों में रोगमुक्ति (Cure) की संभावना बढ़ाती है।
  • उन्नत अवस्था के कैंसर में भी लक्षणों को कम करके जीवन की गुणवत्ता बेहतर बना सकती है।

स्तन, फेफड़े, अंडाशय, बड़ी आंत, ल्यूकेमिया, लिम्फोमा तथा अनेक अन्य कैंसरों में कीमोथेरेपी ने उपचार परिणामों में उल्लेखनीय सुधार किया है।

कीमोथेरेपी के सामान्य दुष्प्रभाव

कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव दवा के प्रकार, उसकी मात्रा तथा प्रत्येक रोगी की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करते हैं। हर रोगी में सभी दुष्प्रभाव नहीं होते।

संभावित दुष्प्रभावों में शामिल हैं—

  • बालों का झड़ना
  • मतली एवं उल्टी
  • अत्यधिक थकान या कमजोरी
  • भूख कम लगना
  • मुंह में छाले
  • स्वाद में परिवर्तन
  • दस्त या कब्ज
  • रक्त कोशिकाओं की संख्या कम होना
  • संक्रमण का खतरा बढ़ना
  • त्वचा एवं नाखूनों में परिवर्तन

यह जानना महत्वपूर्ण है कि अधिकांश दुष्प्रभाव अस्थायी होते हैं। उपचार समाप्त होने के बाद बाल सामान्यतः दोबारा उग आते हैं और शरीर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटने लगता है।

आज मतली, उल्टी, संक्रमण और अन्य दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए अत्यधिक प्रभावी सहायक दवाएं उपलब्ध हैं, जिससे उपचार पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और आरामदायक हो गया है।

कीमोथेरेपी के दौरान आवश्यक सावधानियां

उपचार के दौरान कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • संतुलित एवं पौष्टिक भोजन करें।
  • पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पिएं।
  • व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
  • हाथों की नियमित सफाई करें।
  • भीड़भाड़ एवं संक्रमण वाले स्थानों से यथासंभव बचें।
  • चिकित्सक द्वारा निर्धारित समय पर रक्त जांच अवश्य कराएं।
  • पर्याप्त विश्राम लें तथा हल्की शारीरिक गतिविधि बनाए रखें, यदि चिकित्सक अनुमति दें।

किसी भी प्रकार का बुखार, सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक कमजोरी, असामान्य रक्तस्राव या लगातार उल्टी होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा, आयुर्वेदिक औषधि, हर्बल सप्लीमेंट या स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद का सेवन न करें, क्योंकि वे कीमोथेरेपी की दवाओं के प्रभाव को बदल सकते हैं।

क्या कीमोथेरेपी हमेशा दर्दनाक होती है?

यह भी एक सामान्य तौर पर फैला हुआ भ्रम है। वास्तव में अधिकांश रोगियों को कीमोथेरेपी के दौरान केवल दवा चढ़ाने की प्रक्रिया से सामान्य इंजेक्शन जैसा अनुभव होता है।

उपचार के दौरान होने वाली असुविधाएं व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करती हैं और आधुनिक चिकित्सा के कारण उन्हें काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

मानसिक और पारिवारिक सहयोग का महत्व

कीमोथेरेपी केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे समय में परिवार का सहयोग, संतुलित दिनचर्या, सकारात्मक सोच, पर्याप्त नींद तथा आवश्यकता पड़ने पर मनोवैज्ञानिक परामर्श रोगी के आत्मविश्वास और उपचार की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आवश्यक सावधानियां

कीमोथेरेपी आधुनिक कैंसर की एक प्रभावी, वैज्ञानिक और व्यापक रूप से सफल उपचार पद्धति है। इसके बारे में फैली भ्रांतियों के कारण उपचार से डरना उचित नहीं है।

सही रोगी में, सही समय पर और विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजिस्ट की देखरेख में दी गई कीमोथेरेपी कैंसर को नियंत्रित करने, उसके दोबारा होने की संभावना कम करने और अनेक मामलों में रोगमुक्ति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

याद रखने योग्य बातें

कीमोथेरेपी से डरें नहीं, बल्कि उसे समझें।

समय पर उपचार, संतुलित आहार, नियमित जांच, सकारात्मक सोच और परिवार का सहयोग—ये सभी मिलकर उपचार को अधिक सफल और रोगी के जीवन को अधिक सुरक्षित एवं बेहतर बना सकते हैं।

यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

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