चक्कर आना: कारण और उपचार

चक्कर आना: कारण और उपचार

ओह माइ गोड मुझे चक्कर आ रहा है। ये लाइन आजकल सामान्य हो गई है। चक्कर आना यानी सिर तेजी से घूमना, सर में दर्द होना या सिर का गोल-गोल घूमना। चक्कर आने के पीछे कई सारे कारण हो सकते हैं जैसे कि ब्लड प्रेशर लो रहना,आपकी लाइफस्टाइल, खाना पीना का सेवन या नींद के कमी के कारण भी चक्कर आ सकते हैं। इसमें व्यक्ति को कुछ भी समझ नहीं आता है, वे सही से खड़ा भी नहीं हो पाता। सिर के तेजी से घूमने के कारण उसे लगता है कि वे गिर सकता है। बहुत सारे लोगों को सुबह उठते ही चक्कर से आने लगते हैं, ये शरीर में बीमारी का संकेत हैं जिसको हमें अनदेखा नहीं करना चाहिए। वरना शरीर में दिल की बीमारी या डिप्रेशन जैसी दिक्कतें हो सकती है। काफी देर तक भूखे रहने, कमजोरी, अधिक काम करने की वजह से कई बार चक्कर आ जाते हैं। लेकिन यह समस्या अगर बार-बार होती है। तो आपको तुरंत ध्यान देना चाहिए।
लक्षण

  • हिलने-डुलने या घूमने की अनुभूति
  • अस्थिरता या संतुलन की हानि
  • सिर भारीपन जैसा महसूस होना
  • तैरने का एहसास
  • खड़े होने या सिर को तेजी से हिलाने पर चक्कर आने की ऐसी भावनाएँ उत्पन्न हो सकती हैं या बिगड़ सकती हैं।

    कारण
  • डिप्रेशन या स्ट्रेस में रहना
  • माइग्रेन की समस्या होना
  • ज्यादा तेल मसाले वाली चीजें खाना
  • नींद न पूरी ले पाना -बॉडी में इम्युनिटी का कमजोर होना
  • शरीर में विटामिन बी की कमी होना
  • कमजोरी बने रहना
  • खराब रक्त परिसंचरण
  • न्यूरोलॉजिकल समस्याएं और स्थितियाँ
  • घबराहट की बीमारियां
  • रक्तचाप कम करने वाली दवाएं, अवसादरोधी, शामक और ट्रैंक्विलाइज़र जैसी दवाएं और औषधियां चक्कर आने का कारण बन सकती हैं और भी बहुत सारी वजहें हैं जिनके कारण चक्कर आ सकते हैं।

    उपचार
  • बैठने या लेटने की स्थिति से धीरे-धीरे खड़ा होना या बैठना।
  • हाइड्रेटेड रहना, खासकर व्यायाम करते समय या गर्म वातावरण में काम करते समय।
  • नमक का सेवन सीमित करें।
  • शराब, कैफीन और तंबाकू उत्पादों से परहेज करें।
  • पर्याप्त नींद हो।

    बचाव
  • चक्कर आना लगभग हमेशा अनायास होता है जिससे सिरदर्द को रोकना मुश्किल हो जाता है हालांकि, सिरदर्द को रोकने के लिए कुछ सरल सुझावों का पालन करने से मदद मिल सकती है।
  • तेजी से हिलने-डुलने या स्थिति बदलने से बचें
  • योग जैसी गतिविधियाँ और ताई ची जैसी प्रदर्शन कलाएँ आज़माएँ जो संतुलन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं
  • यदि आवश्यक हो तो डॉक्टर के मार्गदर्शन में दवाएँ बदलें
  • मोशन सिकनेस से बचने के लिए यात्रा करते समय ओटीसी दवाएँ अपने पास रखें और घरेलू उपचार आज़माएँ
  • हाइड्रेटेड रहना

    घरेलू उपाय
  • तुलसी के रस में शक्कर मिलाकर सेवन करने से या तुलसी के पत्तों में शहद मिलाकर चाटने से चक्कर आने की समस्या कम हो जाती है।
  • धनिया पाउडर 10 ग्राम, आंवले का पाउडर 10 ग्राम दोनों को मिलाकर एक गिलास पानी में भिगोकर रात को रख दें और सुबह उठकर इसे अच्छी तरह मिलाकर पी लें। इससे चक्कर आने की समस्या बंद हो जाएगी।
  • खरबूजे के बीज चक्कर आने की समस्या से राहत दिलाते हैं। आप बीज को पीसकर घी में भून लें और इसकी थोड़ी-थोड़ी मात्रा सुबह-शाम लें। जिससे चक्कर आने की समस्या नहीं होगी।
  • चक्कर आने पर आप आधा गिलास पानी में दो लौंग डालकर उसे खूब उबाले। जब वह पानी आधा रह जाए तो उसे पीएं। उससे काफी लाभ होगा।
  • मुनक्का को घी में भून कर उसमें सेंधा नमक मिलाकर खाने से चक्कर आने की समस्या खत्म हो जाती है। इसी के साथ जिन लोगों को चक्कर आते हैं। उन्हें दोपहर के भोजन के 2 घंटे पहले और शाम के नाश्ते में फलों का जूस पीना चाहिए। रोजाना जूस पीने से चक्कर आना बंद हो जाएंगे ।लेकिन जूस में मीठा मसाला या अन्य कोई चीज नहीं डाले। सादा जूस पीये। इसी के साथ चाय कॉफी का सेवन कम करना चाहिए।
    यदि घरेलू उपचार के बावजूद सिरदर्द बना रहता है, तो समस्या की जड़ की पहचान करने के लिए डॉक्टर से मिलने की सलाह दी जा सकती है।

यदि चक्कर आने की समस्या बार-बार हो रही है, तो सही जांच और प्रभावी इलाज के लिए यशोदा हॉस्पिटल में विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लें, जहाँ आधुनिक सुविधाओं के साथ आपकी समस्या का सटीक निदान और बेहतर उपचार किया जाता है।

यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद

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यशोदा अस्पताल गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली एनसीआर में सर्वश्रेष्ठ सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में से एक है। यशोदा हॉस्पिटल का लक्ष्य सिर्फ दिल्ली एनसीआर, गाजियाबाद और नोएडा में ही नहीं बल्कि पूरे देश में सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल होने के नाते, यशोदा अस्पताल में एक ही छत के नीचे सभी समर्पित विशिष्टताएँ हैं- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सामान्य सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी और आंतरिक चिकित्सा, आर्थोपेडिक्स, मूत्रविज्ञान और कई अन्य।

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