पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम PCOS का आयुर्वेदिक इलाज
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम हार्मोनल संतुलन के बिगड़ने से होने वाला रोग है। यह स्थिति व्यस्क महिलाओं में आम है, जिसके कई गंभीर परिणाम होते हैं। पीसीओएस से पीड़ित होने वाली महिलाओं में मासिक धर्म अनियमित और लंबे समय तक हो सकता है। इसके अलावा यह समस्या एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) के लेवल को बढ़ाने का काम करती है। इसके साथ ही इस समस्या से ग्रसित महिलाओं में नियमित रूप से अंडा नहीं बन पाता है। जिससे महिलाओं को गर्भधारण करने में कठिनाई होती है।
इससे पीड़ित होने पर महिलाएं अनियमित मासिक धर्म, बाल झड़ने, सिर में दर्द, चेहरे पर मुहांसे, पेट में दर्द और वजन बढ़ने जैसी समस्याओं को अनुभव कर सकती हैं। पीसीओएस का इलाज करने के ढेरों तरीके मौजूद हैं, लेकिन आज हम आपको उन ख़ास आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के बारे में बताने वाले हैं जिनकी मदद से आप घर बैठे अपनी समस्या से छुटकारा पा सकती हैं। ऐसे में इससे छुटकारा पाने के लिए आयुर्वेदिक इलाज एक बेहतर विकल्प नज़र आता है।
आयुर्वेदिक इलाज
पुदीने की चाय – यदि आप बढ़े हुए टेस्टोस्टेरोन, हिर्सुटिज़्म से जूझ रहें हैं और आपको ओवुलेट करने में परेशानी होती है, तो सुपरमिंट टी आपकी दिनचर्या में एक बढ़िया बदलावा ला सकती है। यह ओव्यूलेशन को बढ़ावा देता है और एण्ड्रोजन को कम करता है। हर सुबह खाली पेट इसे पीना कई फायदे पहुंचा सकता है।
अदरक की चाय – अदरक महिलाओं के शरीर में मौजूद हार्मोन के रेग्यूलेट करने का काम करती है। अदरक में एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण पाए जाते हैं। जो पीसीओएस के कारण होने वाले ऐंठन, मूड स्विंग और सिरदर्द जैसे लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करता है। आप इसे सुबह या शाम किसी भी समय पी सकते हैं। इसके अलावा अतिरिक्त लाभ के लिए आप इसमें नींबू या शहद भी मिला सकते हैं।
ग्रीन टी – यह पीसीओएस से पीड़ित अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में इंसुलिन प्रतिरोध और टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करने में योगदान देता है। ऐसे में आप नोर्मल चाय की जगह इस सेहतमंद चाय को अपने आहार का हिस्सा बना सकती है।
दालचीनी की चाय – दालचीनी आपके बढ़े हुए ब्लड शुगर और इंसुलिन के स्तर (जो पीसीओएस में सबसे आम है) को कम करने का काम करती है। इसके साथ ही वजन कम करने और पीरियड्स को नियमित करने में भी मदद करता है। कैफिन फ्री होने की वजह से आप इसे दिनभर में कभी भी एक कप पी सकते हैं।
मेथी – पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम में वजन तेजी से बढ़ता है इसलिए मेथी का सेवन करें। मेथी शरीर में ग्लूकोज के चयापचय को बढ़ावा देती है और इंसुलिन को बढ़ने से रोकती है। मेथी के बीजों को रात को पानी में भिगो दें तथा खाली पेट एक चम्मच भीगे हुए बीजों को शहद के साथ लें।
मुलेठी – मुलेठी की जड़ टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करने में मदद करती है। एक चम्मच मुलेठी के चूर्ण को एक कप पानी में डालकर उबाल लें। इसका सेवन करने से PCOD की समस्या से निजात पाई जा सकती है।
तुलसी – औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी ना सिर्फ इम्यूनिटी मजबूत करती है बल्कि कई बीमारियों का उपचार भी करती है। तुलसी में एंटी-एंड्रोजेनिक गुण पाए जाते हैं, जो शरीर से टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करने में मदद करते है। एक पैन में 8–10 तुलसी की पत्तियों को डालकर काढ़ा बना लें और उसका सेवन करें।
