पीसीओडी(PCOD) और प्रेगनेंसी से जुड़ी सभी जरूरी बातें
महिलाओं में हार्मोन असंतुलन की परेशानी तेजी से पनप रही है, जिसकी वजह से उन्हें कई बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। बदलते लाइफस्टाइल, खान-पान और नींद की कमी से हॉर्मोन्स में उतार-चढ़ाव बना रहता है जिसकी वजह से महिलाओं को पॉली सिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आकंड़ों के मुताबिक हमारे देश में हर 10 में से 1 महिला पीसीओडी की शिकार है। पीसीओडी ओवरी से जुड़ी बीमारी है जिसमें ओवरी में गांठें यानि सिस्ट बन जाती हैं।
अगर समय पर हार्मोन को बैलेंस नहीं किया गया तो कम उम्र में ही वजन बढ़ना, डायबिटीज, हार्ट अटैक, हाई कोलेस्ट्राल, हाई बीपी और डिप्रेशन की परेशानी के साथ साथ आगे चलकर प्रेग्नेसीं में भी दिक्कत आ सकती है।
आजकल महिलाओं में पीसीओडी की समस्या बहुत देखी जा रही है और इसके कारण उन्हें प्रेगनेंट होने में दिक्कत आ रही है। पीसीओडी में प्रेगनेंट होना थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि इसकी वजह से ओवरी में न तो एग ठीक तरह से बनते हैं और न ही उनका साइज और क्वालिटी ठीक होती है।
पीसीओडी एक हार्मोनल असंतुलन के कारण पैदा होने वाली स्थिति है इसलिए इसकी वजह से पीरियड्स नियमित नहीं रहते हैं। प्रेगनेंट होने के लिए मासिक चक्र नियमित होना बहुत जरूरी है इसलिए पीसीओडी से ग्रस्त महिलाओं को कंसीव करने में दिक्कत आती है और उनकी बॉडी में कंसीव करने के लिए जरूरी हार्मोंस नहीं बन पाते हैं।
खासतौर पर इन वजह से उन्हें गर्भधारण करने में काफी मुश्किलें होती हैं। वहीं, कई महिलाएं ऐसी भी हैं, जिनके मन में इस बात को लेकर सवाल रहता है कि आखिर वह पीसीओडी में प्रेग्नेंट हो सकती हैं या नहीं। ऐसे यह बेहद जरूरी है कि महिलाओं को इस बीमारी से जुड़ी सभी जानकारी हो।
पीसीओडी में रखना चाहिए इन बातों का ध्यान
- पीसीओडी में कंसीव करने की कोशिश कर रही महिलाओं को यह सलाह दी जाती है कि उन्हें पहले अपना हार्मोनल चेकअप करवाएं। इससे पता चलेगा कि आपकी बॉडी में कौन-सा हार्मोन असंतुलित है जिसकी वजह से आपको प्रेगनेंट होने में दिक्कत आ रही है।
- पीरियड्स के दूसरे या तीसरे दिन हार्मोनल टेस्ट होते हैं और इसकी रिपोर्ट के आधार पर पता चलता है कि आपके हार्मोन में क्या-क्या परेशानियां हैं।
- शरीर में हार्मोंस का लेवल जानने के लिए एएमएच, थायराइड, प्रोलैक्टिन, एफएसएच, एलएच टेस्ट करवाए जाते हैं। इन टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर इलाज दिया जाता है।
- प्रेगनेंट होने के लिए आपको सबसे पहले अपने लाइफस्टाइल को बदलना होगा। अपना वेट कंट्रोल में रखें।
- तला-भुना, चीनी, सफेद चावल और मैदा से बनी चीजें खाने से बचें।
- अपने खाने में ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियों, अनाज और फलों को शामिल करना है।
इलाज - पीसीओडी को ठीक करने के साथ-साथ प्रेगनेंट होने के लिए एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है। आप सप्ताह में कम से कम तीन या चार बार आधे घंटे के लिए एक्सरसाइज जरूर करनी है वरना दवाइयां भी असर करना बंद कर देंगी।
- इस हार्मोनल विकार में कंसीव करने के लिए डॉक्टर अर्चना ने कुछ घरेलू नुस्खे भी बताए। उन्होंने कहा कि डाइट, लाइफस्टाइल ठीक करने और एक्सरसाइज करने के अलावा कुछ घरेलू नुस्खे भी आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
- अपनी फर्टिलिटी को बढ़ाने के लिए आप अलसी के बीज, मेथीदाने का पानी पी सकती हैं। इसके अलावा एग की क्वालिटी को बेहतर करने के लिए दवाइयां दी जाती हैं जिसमें मायोइनिसिटॉल शामिल है। पीसीओडी में प्रेगनेंट होने के लिए विटामिन डी का लेवल भी नॉर्मल करना जरूरी है।
- अगर इस सबके बावजूद भी आप प्रेगनेंट नहीं हो पा रही हैं, तो डॉक्टर आपको अंडा बनाने या उसका साइज या क्वालिटी ठीक करने यानि ओवुलेशन इंड्यूसिंग दवाइयां देते हैं। अगर इससे भी असर नहीं होता है, तो फिर कुछ इंजेक्शनों की मदद से ओवरी के अंदर एग को तैयार कर के गर्भधारण की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
पीसीओडी होने पर कंसीव करने में काफी मुश्किलें आती हैं। दरअसल, पीसीओडी की वजह से शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम और एंड्रोजेन का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में कुछ महिलाओं को यह लगता है कि इस बीमारी में प्रेग्नेंट होना असंभव है। लेकिन यह बात पूरी तरह से सच नहीं है। पीसीओडी में भले ही गर्भधारण करना मुश्किल है, लेकिन यह नामुमकिन नहीं है। हार्मोंस को कंट्रोल कर और दवाइओं की मदद से महिला आसानी से गर्भ धारण कर सकती हैं।
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